फाइल फोटो
नई दिल्ली:
- महबूबा मुफ्ती की पीडीपी हमेशा से पकिस्तान के साथ संवाद की वकालत करती रही, वहीं बीजेपी ने आतंकवाद के साथ बातचीत न करने का हवाला दिया.
- पीडीपी ने कश्मीर में पत्थरबाज़ों के साथ नरमी बरतने की हामी रही, वहीं बीजेपी आतंकवाद के ख़िलाफ सख़्त कार्रवाई की वकालत करती रही है.
- कठुआ मामले में पीडीपी पीड़ितों के साथ खड़ी रही, जबकि बीजेपी के मंत्री आरोपियों के हक़ में निकले जुलूस में दिखे. इतना ही नहीं बीजेपी के मंत्रियों को इसके चलते इस्तीफा देना पड़ा.
- पीडीपी रमजान के महीने के बाद भी संघर्षविराम कायम रखने की वकालत करती रही, वहीं बीजेपी इसके ख़िलाफ़ रही हालांकि उसने रमजान के महीने में पीडीपी के संघर्षविराम की मांग को मानी थी.
- पीडीपी हमेशा पत्थरबाजों के समर्थक रही है इसलिए सेना ने जब पत्थरबाजों पर कार्रवाई की तो उन्होंने जवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, वहीं बीजेपी हमेशा इसकी मुखालफत करती रही लेकिन गठबंधन की मजबूरियों के चलते उन्हें कई बार महबूबा मुफ्ती की बात माननी भी पड़ी.
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