बुराड़ी के एक घर में 11 लोगों की लाश मिलने के मामले को दिल्ली पुलिस ने सुलझा लिया है
नई दिल्ली:
- परिवार के 11 लोगों का खुदकुशी का कोई इरादा नहीं था और वह ये सब तपस्या अपने अच्छे भविष्य के लिए कर रहे थे, लेकिन एक हादसे के तौर पर उनकी मौत हो गई. इसमें सिर्फ तीन लोगों भूपी, ललित और टीना के हाथ खुले हुए थे.
- यह परिवार बरगद की तपस्या करके अपने परिवार की खुशहाली के लिए यह पूजा कर रहा था जो 7 दिन से चल रही थी. ये पूजा एक आत्मा को खुश करने के चक्कर में 11 लोगों की जान चली गई.
- पिछले 11 साल में ललित ने पिता की आत्मा आने के बाद जो फैसले लिए उसकी वजह से परिवार की काफी तरक्की हुई. एक दुकान से तीन दुकान हो गईं. घर भी अब दोबारा बनाया जा रहा था.
- प्रियंका मांगलिक थी जिसकी वजह से उसकी शादी नहीं हो रही थी. पिता के कहने पर जब एक ख़ास पूजा करने के बाद 17 जून को उसकी शादी एक अच्छे लड़के से तय होने के बाद सगाई भी हो गई तो परिवार काफी खुश था.
- ललित के अंदर उसके पिता आए और उन्होंने 24 जून से 7 दिन तक चलने वाली बड़ पूजा यानी बरगद की तपस्या करने को कहा. ललित ने परिवार को बताया कि हमें 24 जून से 7 दिन तक बरगद की तपस्या करनी है. इसके बाद हमारे दिन और अच्छे और खुशहाल हो जाएंगे.
- परिवार 24 जून से रोज़ रात में पूजा करता था. इस पूजा से पहले ही 30 तारीख को रात 12 से एक बजे के बीच में सबको बरगद के पेड़ की शाखाओं की तरह खड़ा होना था. किसको कहां खड़ा होना है, क्या करना है, यह सब रजिस्टर में पहले से ही लिखा था.
- पुलिस ने घर के बाहर लगे सीसीटीवी में देखा- 30 जून को रात 10:00 बजे नीतू और उसकी मां 6 काले रंग के स्टूल लेकर ऊपर गईं. रात 10:40 पर डिलीवरी ब्वाय खाना लेकर आया और वह उसने प्रियंका को दिया.
- रात 10.57 बजे भूपी कुत्ते को घुमाने के लिए बाहर आया. अगले दिन सुबह 5:56 बजे ट्रक दूध लेकर आया. आम तौर पर दुकान सुबह 6 बजे खुल जाती है, लेकिन जब दुकान नहीं खुली तो ट्रक वाले ने कई बार फोन मिलाया लेकिन किसी ने नहीं उठाया. ट्रक 6:03 बजे चला गया. सुबह 7:14 बजे नौकरों ने पड़ोस के सरदार जी से कहा तो वे ऊपर गए. वे 35 सेकेंड में नीचे आ गए और शोर मचा दिया.
- 30 जून को आख़िरी बार यह डायरी लिखी गई. डायरी के ब्योरे डरावने ढंग से मौत के ब्योरों से मिलते हैं. ये आख़िरी पन्ना बताता है.
- घर से 11 रजिस्टर मिले हैं जिनमें मौत की पूरी स्क्रिप्ट पहले से ही लिखी हुई है. पुलिस ने बताया कि पिछले 11 साल से ललित के पिता उसके सपने में आ रहे थे. वह 2007 से, यानि 11 साल से अपने पिता की आवाज़ निकाल रहा था. परिवार के 11 सदस्यों के अलावा किसी को यह बात पता नहीं थी.
- 11- इस परिवार का सरनेम भाटिया नहीं बल्कि चुंडावत है. दरअसल प्रतिभा की शादी भाटी से हुई थी, जिनकी मौत हो गई थी. प्रतिभा बच्चों को पढ़ाती थी तो बच्चे उन्हें भाटिया मैडम बोलते थे.
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