आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.
नई दिल्ली:
- आधार एक्ट 2016 को सरकार ने 16 मार्च 2016 को मंजूरी दी थी. इसे मनी बिल के रूप में पेश किया गया था. मनी बिल के तहत राजस्व और खर्च से जुड़े हुए मामले आते हैं. इस पर अंतिम फैसला लोकसभा लेती है. ऐसे विधेयकों पर राज्य सभा में चर्चा तो हो सकती है लेकिन उस पर कोई वोटिंग नहीं होती है.
- आधार एक्ट 2016 को गुड गवर्नेंस के लिए जरूरी बताया गया है. आधार एक्ट 2016 कहता है कि UIDAI यानी यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया को महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, शारीरिक रूप से अक्षम लोगों, अकुशल और असंगठित कामगारों को आधार नंबर जारी करने के लिए विशेष पहल करनी होगी
- आधार एक्ट 2016 के मुताबिक इस पर आने वाला खर्च भारत सरकार के समेकित कोष से वहन किया जाएगा और इसका इस्तेमाल उन सभी लाभों के लिए किया जाएगा जो भारत की समेकित निधि से दिए जाते हैं.
- एक्ट में कहा गया है कि इससे सरकारी सब्सिडी, सेवाओं और अन्य सुविधाओं में पारदर्शिता और तत्परता आएगी. एक्ट के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें सेवा, सुविधा या सब्सिडी के वितरण के लिए आधार का इस्तेमाल कर सकती हैं.
- आधार एक्ट 2016 की वजह से UIDAI (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) को संवैधानिक वैधता मिली. एक्ट में UIDAI की स्थापना व नियुक्तियों का भी प्रावधान है. एक्ट के मुताबिक संस्था में चेयरपर्सन (पूर्णकालिक या अस्थायी) तथा दो सदस्य (अस्थायी) होंगे.
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