Yashoda jayanti kab hoti hai (2026 Maa Yashoda Jayanti Date and Time) : कृष्ण के पिता वासुदेव ने कृष्ण भगवान के पैदा होते ही उन्हें कंस से बचाने के लिए गोकुल में नंद बाबा के पास छोड़ दिया था, इसलिए कृष्ण भगवान को मां यशोदा की माता के रूप में ही जाना जाता है. कथा के अनुसार, माता यशोदा ने अपने पूर्व जन्म में भगवान विष्णु की तपस्या की थी. विष्णु भगवान ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर और उनसे वर मांगने को कहा। ऐसे में मां यशोदा ने कहा कि मेरी तपस्या तभी पूर्ण होगी, जब आप मुझे पुत्र के रूप में प्राप्त होंगे. तब श्री हरि ने कहा कि वो माता देवकी और वासुदेव के घर जन्म लेंगे. लेकिन मातृत्व का सुख मुझे उन्हें ही प्राप्त होगा. और इसके बाद समय के साथ ऐसा ही हुआ, माता यशोदा ने ही श्रीकृष्ण को मातृत्व का सुख दिया और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का लालन और पालन किया. और तब से यशोदा जयंती हिंदू धर्म में एक खास त्योहार के तौर पर मनाया जाता है. यह दिन श्रीकृष्ण की मैया मां यशोदा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. मां यशोदा को पालन-पोषण, ममता और वात्सल्य से पूर्ण मां के रूप में माना गया है. उनके बिना श्रीकृष्ण के चरित्र की पूर्णता असंभव मानी जाती है. चलि आपको बतातो हैं कि यशोदा जयंती 2026 में कब आएगी और उसका मुहूर्त कब होगा.
कब है यशोदा जयंती 2026 | Yashoda jayanti kab hai 2026
यशोदा जयंती 7 फरवरी 2026 को शनिवार के दिन है. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 07 फरवरी को सुबह 1:18 पर होगी. इस तिथि का समापन 08 फरवरी 2026 की सुबह 2:54 बजे को होगा. इसलिए धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अनुष्ठान और व्रत 07 फरवरी को ही किए जाएंगे.

हिंदू कैलेंडर के अनुसार जानिए यशोदा जयंती | Hindu calender ke anusar yashoda jayanti kab hai
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी पर मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यशोदा जयंती पर पूजा और व्रत रखने से विशेष महत्व रहा है. संतान-सुख, पारिवारिक सौहार्द और घर-परिवार में कल्याण के लिए यह व्रत रखा जाता है. इसलिए विवाहित महिलाएं और दंपत्ति इस दिन विशेष तौर पर पूजा करते हैं.
यशोदा जयंती कैसे मनाएं | How to celebrate Yashoda Jayanti
यशोदा जयंती के दिन पूजा-अर्चना की जाती है. भक्त सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं, ताकि तन के साथ मन भी शुद्ध रहे. इसके बाद भक्त घर के पूजा स्थान को साफ कर मां यशोदा और बाल श्रीकृष्ण की तस्वीर या मूर्ति को पीले वस्त्र पहनाते हैं. पूजा में तुलसी, रोली, चंदन, हल्दी, धूप-दीप, ताजे फूल और फल मां यशोदा को अर्पित किए जाते हैं. बाल कृष्ण के प्रिय भोग के रूप में माखन-मिश्री चढ़ाई जाती है, जिससे पूजा में वात्सल्य और प्रेम का भाव जुड़ जाता है.
इस दौरान भक्त श्रद्धा से गोपाल सहस्त्रनाम या मां यशोदा से जुड़े स्तोत्रों का पाठ स्मरण करते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं. पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद घर के सभी सदस्यों में वितरीत करें. कई श्रद्धालु इस दिन फलाहार भी रहते हैं या उपवास या व्रत भी रखते हैं और पूरे दिन मन को शांत रखते हुए पूजा-पाठ और भक्ति में समय बिताते हैं.

यशोदा जयंती का क्या महत्व है | what is the significance of yashoda jayanti
यशोदा जयंती केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि मातृत्व की उस भावना का उत्सव भी है जिसमें निस्वार्थ प्रेम और सेवा भाव समाया हुआ है. मां यशोदा का जीवन यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम बिना किसी अपेक्षा के किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान से जुड़ी चिंताएं भी दूर होती हैं. यही वजह है कि यह पर्व भावनात्मक जुड़ाव और आस्था के साथ मनाया जाता है. जहां भक्ति केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मन की गहराइयों से निकलती है.
क्या है व्रत पारण का समय?
पारण समय (Paran Time): व्रती अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद पूजा-पाठ करके व्रत खोल सकते हैं. विशेष समय के लिए स्थानीय पंचांग देखना उत्तम रहेगा.