Mangala Gauri Vrat 2026 : सावन का महीना शुरू होते ही भगवान शिव के साथ मां पार्वती की पूजा का महत्व भी बढ़ जाता है. खासकर मंगलवार का दिन कई महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन मंगल गौरी व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से शादीशुदा जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार पर मां गौरी की कृपा बनी रहती है. इस बार सावन का पहला मंगल गौरी व्रत कई वजहों से खास माना जा रहा है. एक तरफ यह सावन का पहला मंगलवार है, वहीं दूसरी ओर इस दिन एक साथ तीन शुभ योग भी बन रहे हैं. ऐसे में अगर आप भी यह व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले इसकी तारीख, पूजा का सही समय और इससे जुड़े जरूरी नियम जान लेना आपके लिए फायदेमंद रहेगा.
क्यों रखा जाता है मंगल गौरी व्रत?
मंगल गौरी व्रत मां पार्वती की कृपा पाने के लिए रखा जाता है. मान्यता है कि इससे शादीशुदा जीवन में खुशियां बनी रहती हैं, पति की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है. कई अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं. यही वजह है कि सावन के मंगलवार को मां गौरी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है.
इस बार क्यों खास माना जा रहा है यह व्रत?
इस बार सावन का पहला मंगल गौरी व्रत 4 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार, इस दिन कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रात 10:03 बजे तक रहेगी. इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शिव और भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है.
इस बार पहले मंगल गौरी व्रत पर एक साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं. ये तीनों शुभ योग 4 अगस्त की रात 9:54 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे संयोग में पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा सुबह से शाम 7:33 बजे तक धृति योग रहेगा और इसके बाद शूल योग शुरू होगा. वहीं रेवती नक्षत्र रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र लग जाएगा.
पूजा का शुभ समय क्या रहेगा?
अगर आप इस दिन मंगल गौरी की पूजा करने जा रहे हैं, तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है, जबकि सामान्य पूजा का समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक माना गया है. जो लोग प्रदोष काल में पूजा करते हैं, वे शाम 7:10 बजे के बाद पूजा शुरू कर सकते हैं.
मंगल गौरी व्रत से जुड़ी एक पुरानी परंपरा भी है. मान्यता है कि शादी के बाद जब पहला सावन आता है, तो महिला को पहला मंगल गौरी व्रत अपने मायके में रखना चाहिए. इसके बाद अगले चार साल तक यह व्रत ससुराल में रखा जाता है. यानी शादी के बाद लगातार पांच साल तक इस व्रत को करने की परंपरा बताई जाती है.
इस दिन भद्रा और पंचक का भी रहेगा संयोग
पहले मंगल गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक दोनों का संयोग भी रहेगा. भद्रा 4 अगस्त रात 10:03 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त सुबह 5:45 बजे तक रहेगी. मान्यता है कि इस दौरान भद्रा स्वर्ग लोक में रहेगी, इसलिए इसका शुभ कामों पर नकारात्मक असर नहीं माना जाता. वहीं चोर पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा. परंपरा के अनुसार, इस दौरान कीमती सामान का थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है.
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