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Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी का व्रत कल, करें ये 3 आसान उपाय, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है. वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा.

Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी का व्रत कल, करें ये 3 आसान उपाय, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व
एकादशी
file photo

Ekadashi kab hai: वरुथिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है. यह व्रत वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और भक्त श्रद्धा के साथ उपवास रखते हैं. पंचांग के नियमों के अनुसार, एकादशी का व्रत उसी दिन रखा जाता है, जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होती है. वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल, 2026 को मध्यरात्रि 1 बजकर 17 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 13 अप्रैल, 2026 को मध्यरात्रि 1 बजकर 9 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयाति​थि के अनुसार इस साल वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल, 2026 को रखा जाएगा.

एकादशी व्रत की तारीख

  • एकादशी तिथि प्रारंभ- 13 अप्रैल 2026, रात 01:10 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त- 14 अप्रैल 2026, रात 01:08 बजे
  • पारण की तारीख- मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
  • पारण का समय- सुबह 06:54 बजे से 08:31 बजे तक
वरुथिनी एकादशी पर करें ये 3 उपाय

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का उपाय- वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पूजा के दौरान ताजे गन्ने के रस से श्री हरि का अभिषेक करें. शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करने से आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है और धन प्राप्ति के योग बनने लगते हैं.

तुलसी की पूजा- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वरुथिनी एकादशी पर तुलसी पूजन करना बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन तुलसी की पूजा और तुलसी चालीसा का पाठ करें.

लक्ष्मी मंत्र का जाप- वरुथिनी एकादशी पर लक्ष्मी जी की पूजा करना फलदायी माना जाता है. इस दिन आप विशेष रूप से 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करें.

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वरुथिनी एकादशी व्रत नियम

इस दिन भक्त सरल और अनुशासित जीवन अपनाते हैं. जैसे- अनाज, चावल, प्याज और लहसुन का सेवन न करें. फल, दूध और सूखे मेवे जैसे सात्विक भोजन लें. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, ध्यान और मंत्र जाप करें. वरुथिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें.

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