वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ घाटों की तस्वीर बदल गई है. अहिल्याबाई घाट पर स्थित शीतला माता का प्राचीन मंदिर पानी में डूब गया है. मान्यता के अनुसार, गंगा का पानी मंदिर तक पहुंचते ही शीतला माता की प्रतिमा को ऊंचाई पर स्थित अहिलेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान कराया गया है. यहां माता की पूजा-अर्चना और आरती होती है. स्थानीय पुजारी इसे गंगा मैया और शीतला माता के वार्षिक मिलन से जोड़कर देखते हैं. इस परंपरा के पीछे धार्मिक आस्था के साथ काशी के इतिहास की भी गहरी कहानी छिपी है.
जब शीतला माता से मिलती है गंगा मैय्या
जानकारी के अनुसार, गंगा नदी का जलस्तर बढ़ते ही शीतला माता को ऊपर अहिलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापना कर दिया जाता है. महादेव मंदिर के पुजारी बताते हैं कि ये अजीब संयोग होता है कि जब गंगा मैय्या माता शीतला का हर साल मिलन होता है. कहते हैं कि इस मिलन के बाद काशी और इसके आसपास कोई महामारी नहीं आती है. हर साल जब भी गंगा मैय्या का पानी बढ़ता है तब हम मानते हैं कि गंगा मैय्या शीतला माता से मिलती है. शीतला माता को फिर ऊपर अहिलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित करके यहीं पूजा आरती की जाती है. जब तक शीतला देवी का मंदिर पानी में डूबा रहेगा तब तक शीतला देवी की मूर्ति ऊपर ही विराजमान रहेगी.
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प्राचीन मंदिर है अहिलेश्वर महादेव मंदिर
जानकारों के अनुसार, औरंगजेब के शासनकाल में काशी के कई मंदिरों को तोड़ा गया था. लेकिन उसके बाद इंदौर की शासक और महादेव की भक्त अहिल्या बाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था. साथ ही अहिल्याबाई ने महादेव का प्राचीन मंदिर भी बनवाया था. बाढ़ के वक्त इसी मंदिर में शीतला माता की पूजा होती है. अहिलेश्वर महादेव मंदिर से सटा अहिल्या बाई का बाड़ा है.
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1780 में बनी थी ऐतिहासिक इमारत

बनारस के अहिल्याबाई घाट के तंग गलियों से गुजरते वक्त आपको कई मंदिर और भवन पर इंदौर स्टेट की छाप दिखाई देगी. अहिलेश्वर महादेव मंदिर के बगल में महावीर का चबूतरा बना हुआ, जहां विशाल पीपल का वृक्ष खड़ा है. इसी घाट में ऊंचाई पर अहिल्याबाई का बाड़ा बना है. इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण 1780 के आसपास हुआ था. इस विशाल प्रागंड की ऊंचाई ज्यादा होने से बाढ़ के वक्त भी गंगा नदी का पानी यहां नहीं पहुंच पाता है. मराठा शैली पर बना ये बाड़ा इंदौर रियासत के अधिकारी और तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए बनाया गया था. इस बाड़े के बीच में खाली जगह बगीचा है जबकि चारों तरफ कमरे बने हैं जहां लोग रुक सकते हैं.
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