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एकादशी कब है, 6 या 7 सितंबर? जानें अजा एकादशी की सही तारीख, पूजा विधि और पारण का समय

इस बार अजा एकादशी का दिन धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है. इस दिन सुबह पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र का संयोग रहेगा. इसके साथ वरीयान और सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेंगे. आइए जानते हैं अजा एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा, साथ ही जानेंगे पूजा विधि और पारण का समय-

एकादशी कब है, 6 या 7 सितंबर? जानें अजा एकादशी की सही तारीख, पूजा विधि और पारण का समय
कब रखा जाएगा एकादशी का व्रत?
(Photo Credit: NDTV)

हिंदू धर्म में एकादशी का दिन भगवान विष्णु की भक्ति के लिए बहुत खास माना जाता है. मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने और इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से मन को शांति मिलती है, पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. साल में कुल 24 एकादशी आती हैं और हर एकादशी का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है. सितंबर 2026 में पड़ने वाली पहली एकादशी अजा एकादशी है. हालांकि, इसकी तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं अजा एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा, साथ ही जानेंगे पूजा विधि और पारण का समय-

6 या 7 सितंबर, कब रखा जाएगा एकादशी का व्रत?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 की शाम 7 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और 7 सितंबर की शाम 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगी. क्योंकि व्रत में उदया तिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा.

अजा एकादशी व्रत का पारण कब होगा?

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 8 सितंबर 2026 को किया जाएगा. पंचांग के अनुसार, पारण के लिए सुबह 6 बजकर 2 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक का समय शुभ रहेगा. व्रत रखने वाले लोग इसी अवधि में स्नान और पूजा के बाद व्रत खोल सकते हैं.

अजा एकादशी पर बनेंगे कई शुभ योग

इस बार अजा एकादशी का दिन धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है. इस दिन सुबह पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र का संयोग रहेगा. इसके साथ वरीयान और सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेंगे.

अजा एकादशी की पूजा विधि
  • अजा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें और पूजास्थल को साफ कर गंगाजल से शुद्ध कर लें.
  • इसके बाद पीले या लंल रंग के कपड़े पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.
  • भगवान को पीला चंदन, अक्षत, फूल, माला, वस्त्र और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें. पूजा में तुलसी दल जरूर रखें.
  • इसके बाद खीर, मिठाई और फल का भोग लगाएं.
  • घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें.
  • इसके बाद विष्णु चालीसा और अजा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें.
  • अंत में भगवान विष्णु और एकादशी माता की आरती करें.

दिनभर व्रत और भगवान विष्णु का स्मरण करने के बाद अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि से पूजा करके पारण करें.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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