सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा-आराधना को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करने और शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साथ ही जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसे में हर सोमवार मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग पर जल चढ़ाने पहुंचते हैं. हालांकि, शास्त्रों में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, यदि इन नियमों का पालन करके भगवान शिव की पूजा की जाए तो पूजा का फल अधिक शुभ माना जाता है.
जल चढ़ाते समय किस दिशा में होना चाहिए मुंह?
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. जल चढ़ाते समय हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह रखना शुभ माना जाता है.
किस पात्र से चढ़ाना चाहिए जल?ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शिवलिंग पर जल हमेशा तांबे, चांदी या कांसे के पात्र से चढ़ाना चाहिए. स्टील या लोहे के पात्र का उपयोग करने से बचना चाहिए. इनमें भी तांबे का पात्र सबसे उत्तम माना गया है. हालांकि, एक बात का विशेष ध्यान रखें कि तांबे के पात्र में दूध नहीं चढ़ाना चाहिए.
इस क्रम में करें जल अर्पितज्योतिषाचार्य आगे बताते हैं, शिवलिंग पर जल चढ़ाने का भी एक विशेष क्रम होता है.
- सबसे पहले जलाधारी की सीधी ओर स्थित भगवान गणेश को जल अर्पित करें.
- इसके बाद बाईं ओर विराजमान भगवान कार्तिकेय को जल चढ़ाएं.
- फिर बीच में माता सुंदरी और सर्प पर जल अर्पित करें.
- इसके बाद पूरे शिवलिंग पर गोल-गोल घुमाते हुए श्रद्धा और भक्ति के साथ जल चढ़ाएं. यह विधि शास्त्रों में शुभ मानी गई है.
भगवान शिव की पूजा में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है. शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का लगातार जाप करना चाहिए. माना जाता है कि यह पंचाक्षरी मंत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसके जाप से मन को शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.
ज्योतिषाचार्य कहते हैं, भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. इसलिए सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय केवल श्रद्धा ही नहीं, बल्कि पूजा से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए. सही विधि से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आती है.
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