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ज्येष्ठ मासिक दुर्गाष्टमी आज, पंड‍ित जी से जान‍िए पूजा विधि, व्रत के नियम और कथा

पंडित कौशल पाण्डेय बताते हैं, मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. मां दुर्गा की कृपा से भय, रोग और संकटों से रक्षा मिलती है. परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है. आइए जानते हैं व्रत के नियम और पूजा विधि-

ज्येष्ठ मासिक दुर्गाष्टमी आज, पंड‍ित जी से जान‍िए पूजा विधि, व्रत के नियम और कथा
ज्येष्ठ मासिक दुर्गाष्टमी आज, जानिए पूजा विधि
(P.C- NDTV)

हिंदू धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है. यह व्रत हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है. इस दिन भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा की आराधना करते हैं. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर माता रानी भक्तों के सभी संकट दूर करती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं.

व्रत के नियम

  • पंडित कौशल पाण्डेय बताते हैं देवी पुराण के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी के दिन व्रत और पूजा के समय घर को खाली नहीं छोड़ना चाहिए. 
  • दुर्गाष्टमी व्रत के दिन उपासक को सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए. इस दिन अन्न का सेवन नहीं किया जाता.
  • यदि कोई व्यक्ति निर्जल या निराहार व्रत रखने में सक्षम न हो तो वह फल और दूध का सेवन कर सकता है.
  • घर में मांसाहार और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है. 
  • साथ ही मन, वचन और कर्म से पवित्र रहकर मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है.
मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि
  • दुर्गाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. 
  • इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. 
  • माता को लाल चुनरी, लाल पुष्प और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. 
  • घी का दीपक जलाएं और धूप, दीप, नैवेद्य तथा फल अर्पित करें. 
  • दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें. 
  • पूजा के बाद प्रसाद बांटें और माता का आशीर्वाद प्राप्त करें. 
  • इस दिन कुमारी पूजन का भी विशेष महत्व है. छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान और पूजन किया जाता है.
मासिक दुर्गाष्टमी व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में दुर्गम नामक एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस था, जिसका आतंक तीनों लोकों में व्याप्त था. उसके अत्याचारों से पीड़ित होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में कैलाश पर्वत पहुंचे. तब भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव सहित समस्त देवताओं ने अपनी दिव्य शक्तियों का समन्वय किया. उनके तेज से शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आदिशक्ति मां दुर्गा प्रकट हुईं. देवताओं ने उन्हें विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए. मां दुर्गा ने अपने अद्भुत पराक्रम और शक्ति से असुरों का संहार किया तथा धर्म और सत्य की पुनः स्थापना की. मां को महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने महिषासुर जैसे शक्तिशाली असुर का वध कर देवताओं और मानव जाति को भयमुक्त किया. मां दुर्गा सिंह पर आरूढ़ होकर अधर्म के विनाश और धर्म की रक्षा के लिए युद्धभूमि में उतरीं और अंततः विजय प्राप्त की.

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत जीवन की अनेक बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करने में सहायक माना जाता है. इस व्रत को करने से मां दुर्गा की कृपा से भक्तों को भय और संकटों से रक्षा प्राप्त होती है. घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है. करियर, व्यापार और आर्थिक क्षेत्र में उन्नति के योग बनते हैं. मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है. साधक को मनोवांछित फल तथा देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

मान्यता है कि श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान से किया गया दुर्गाष्टमी व्रत भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है.

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लेखक के बारे में
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गुरुत्व राजपूत
सब एडिटर
गुरुत्व राजपूत, वर्तमान में एनडीटीवी में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और यूटिलिटी, आस्था और जरा हटके से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. गुरुत्व पिछले... और पढ़ें
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