Shiv Mandir: शिव मंदिर में क्यों होती है नंदी की प्रतिमा, जानिए भक्त क्यों उनके कान में बोलते हैं अपनी इच्छा

Shiv Mandir: धार्मिक मान्यता के अनुसार नंदी (Nandi) को भगवान शिव (Lord Shiva) के वाहन हैं. उन्हें भगवान शिव (Shiv Ji) का द्वारपाल भी कहा जाता है.

Shiv Mandir: शिव मंदिर में क्यों होती है नंदी की प्रतिमा, जानिए भक्त क्यों उनके कान में बोलते हैं अपनी इच्छा

Shiv Mandir: धार्मिक मान्यता के अनुसार नंदी को भगवान शिव के वाहन हैं. उन्हें भगवान शिव का द्वारपाल भी कहा जाता है.

खास बातें

  • भगवान शिव के वाहन हैं नंदी.
  • शिव मंदिर के सामने विराजमान रहते हैं नंदी.
  • भगवान शिव के गण माने जाते हैं नंदी.

Shiv Mandir: शिव मंदिर में शिवलिंग (Shivling) के सामने नंदी (Nandi) विराजमान रहते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार नंदी (Nandi) को भगवान शिव (Lord Shiva) के वाहन हैं. उन्हें भगवान शिव (Shiv Ji) का द्वारपाल भी कहा जाता है. मान्यता है कि भगवान शिव (Shiv) तक अपनी मनोकामाना पहुंचाने के लिए नंदी महाराज (Nandi Maharaj) को प्रसन्न करना जरूरी होता है. नंदी महाराज (Nandi) की प्रतिमा का मुंह हमेशा शिवलिंग (Shivling) की ओर होता है. भक्त (Devotee) भगवान शिव (Lord Shiv) के दर्शन से पहले नंदी के कान में अपनी इच्छा कहते हैं. आखिर इसके पीछे की धार्मिक मान्यता क्या है, इसके बारे में जानते हैं.

नंदी कैसे हो गए भगवान शिव के भक्त

पौराणिक कथा के मुताबिक जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उससे विष निकला था. उस हलाहल विष को भगवान शिव ने पी लिया. कहा जाता है कि भोलेनाथ ने सृष्टि को बचाने के लिए ऐसा किया. जब भोलेनाथ विषपान कर रहे थे तो उस वक्त विष की कुछ बूंदें जमीन पर गिर गईं. जिसे नंदी ने अपनी जीभ से साफ कर दिया. नंदी के समर्पण भाव को देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और नंदी को अपना सबसे बड़ा भक्त बना लिया. 

नंदी की महिमा क्या है 

धार्मिक मान्यताओं में नंदी को भक्ति और शक्ति का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि जो भक्त भगवान शिव का दर्शन करना चाहते हैं, नदीं पहले उसकी भक्ति की परीक्षा लेते हैं. जिसके बाद की भगवान शिव की कृपा का मार्ग प्रशस्त होता है. जहां कहीं भी शिवलिंग के सामने नदीं महाराज विराजामान होते हैं, भक्त भोलेनाथ के दर्शन से पहले उनके कानों में अपनी इच्छा कहते हैं, ऐसी परंपरा चली आ रही है. यही कारण है कि प्रत्येक शिव मंदिर में नदीं महाराज के दर्शन पहले होते हैं, फिर भगवान शिव के दर्शन होते हैं. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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