भगवान शिव की भक्ति भारत में केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. देश के अलग-अलग हिस्सों में शिव से जुड़े कई ऐसे धाम हैं, जिन्हें विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है. भोलेनाथ के भक्तों के बीच खास तौर पर पांच श्रेणियां सबसे ज्यादा अहम मानी जाती हैं. शिव भक्त इन धामों की यात्रा को जीवन की बड़ी आध्यात्मिक साधना मानते हैं.
12 ज्योतिर्लिंग: शिव के दिव्य प्रकाश स्वरूप
12 ज्योतिर्लिंगों को भगवान शिव के स्वयं प्रकट हुए ज्योति स्वरूप का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जहां-जहां शिव ने प्रकाश रूप में दर्शन दिए, वहां ज्योतिर्लिंग स्थापित हुए.
देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले ये 12 धाम इस प्रकार हैं. गुजरात में सोमनाथ और नागेश्वर, आंध्र प्रदेश में मल्लिकार्जुन, मध्य प्रदेश में महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर, झारखंड में वैद्यनाथ, महाराष्ट्र में भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर, तमिलनाडु में रामेश्वरम्, उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ और उत्तराखंड में केदारनाथ शामिल हैं.
शिव भक्तों के लिए इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन विशेष पुण्यदायी माने जाते हैं. कई श्रद्धालु जीवन में एक बार इन सभी धामों की यात्रा को अपना महत्वपूर्ण धार्मिक लक्ष्य मानते हैं.
पंचभूत स्थलम्: पांच तत्वों से जुड़ी आस्था

दक्षिण भारत में पंचभूत स्थलम् की परंपरा विशेष धार्मिक महत्व रखती है. यहां भगवान शिव को प्रकृति के पांच मूल तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि शिव सृष्टि के इन तत्वों के प्रतीक माने जाते हैं.
पंचभूत स्थलम् में कांचीपुरम का एकाम्बरेश्वर मंदिर पृथ्वी तत्व से जुड़ा माना जाता है, तिरुवनैकवल स्थित जंबुकेश्वर मंदिर जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, तिरुवन्नामलाई का अरुणाचलेश्वर मंदिर अग्नि तत्व से संबंधित है, आंध्र प्रदेश का श्री कालहस्ती मंदिर वायु तत्व से जुड़ा है और चिदंबरम का नटराज मंदिर आकाश तत्व का प्रतीक माना जाता है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार इन पांचों स्थलों के दर्शन को शिव के पंचतत्व स्वरूप के दर्शन के समान माना जाता है.
पंच केदार: हिमालय में तप और श्रद्धा

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित पंच केदार यानी केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर मंदिर शिव के पांच रूपों से जुड़े माने जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत के बाद पांडवों ने शिव को प्रसन्न करने के लिए इन स्थलों पर तप किया था. इन मंदिरों तक पहुंचना आसान नहीं है, लेकिन भोलेनाथ के प्रति असीम श्रद्धा हर साल लाखों लोगों को यहां खींच ही लाती है.
पंच कैलाश: शिव के पांच धाम

कैलाश पर्वत को भगवान शिव का दिव्य निवास माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंच कैलाश में पांच प्रमुख धाम शामिल हैं. इनमें तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर सबसे प्रमुख माना जाता है. इसके अलावा उत्तराखंड में आदि कैलाश, हिमाचल प्रदेश में किन्नौर कैलाश और श्रीखंड कैलाश तथा चंबा क्षेत्र में स्थित मणिमहेश कैलाश को पंच कैलाश का हिस्सा माना जाता है.
इन सभी स्थलों की यात्रा कठिन मानी जाती है, क्योंकि ऊंचाई, मौसम और दुर्गम रास्ते श्रद्धालुओं की आस्था और शारीरिक क्षमता दोनों की परीक्षा लेते हैं. फिर भी हर वर्ष बड़ी संख्या में भक्त इन धामों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
अमरनाथ: प्राकृतिक शिवलिंग का दर्शन
जम्मू-कश्मीर की अमरनाथ गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है. अमरनाथ यात्रा देश की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई थी. भोलेनाथ के भक्तों के लिए अमरनाथ की यात्रा विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है.
इन पांचों परंपराओं का स्वरूप अलग है. कहीं शिव ज्योति के रूप में पूजे जाते हैं, कहीं पंचतत्व के रूप में, कहीं हिमालय में विराजमान रूप में, तो कहीं बर्फ के शिवलिंग के रूप में. लेकिन सभी के केंद्र में वही आस्था है जो शिव को सृष्टि के आदि और अनंत स्वरूप के रूप में देखती है. भोलेनाथ के भक्तों के लिए ये धाम केवल मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास के प्रतीक हैं.
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