धर्मनगरी हरिद्वार में मां मनसा देवी का मंदिर आस्था के प्रमुख केंद्रों में शामिल है. सावन में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय से जानिए मां मनसा देवी को भगवान शिव की पुत्री क्यों कहा जाता है और मंदिर से जुड़ी खास मान्यताएं क्या हैं.
शिवालिक की पहाड़ियों पर है मंदिर
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि मां मनसा देवी का मंदिर हरिद्वार से करीब तीन किलोमीटर दूर शिवालिक की पहाड़ियों में बिल्व पर्वत पर स्थित है. इसे बिल्वा तीर्थ भी कहाा जाता है. यह हरिद्वार के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है. मां मनसा देवी को सर्पों की देवी भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि भक्त यहां अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं. साावन के महीने में मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल रहता है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.
शिव की पुत्री और नागों से है संबंध
पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि पौराणिक मान्यताओं में मां मनसा देवी को भगवान शिव की पुत्री कहा गया है. उन्हें ऋषि कश्यप और देवी कद्रु की पुत्री तथा नागराज वासुकी की बहन भी मना जाता है. मान्यता है कि उनकाा विवाह ऋषि जगत्कारू से हुआ था.
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पेड़ पर धागा बांधने की है मान्यता
उन्होंने आगे बताया कि मंदिर परिसर में एक पेड़ को लेकर भी खाास लोक मान्यता है. श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हुए पेड़ की शाखा पर धागा बांधते हैं. मनोकामना पूरी होने पर धागा खोलने के लिए दोबाराा मंदिर आने की परंपरा बताई जाती है.
रोपवे से भी पहुंच सकते हैं आप मंदिर
उन्होंने कहा कि हरिद्वार सड़क और रेल मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. दिल्ली से हरिद्वार करीब 250 किलोमीटर दूर है. हवाई मार्ग से आने वालों के लिए देहरादून का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट नजदीकी विकल्प है. मंदिर तक रोपवे और पैदल मार्ग, दोनों से पहुंचा जा सकता है.
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