हिंदू धर्म में ऋषि पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन सप्तऋषियों और अरुंधती माता की पूजा करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि ऋषि पंचमी का व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा करने का विशेष महत्व है.
15 सितंबर को मनाई जाएगी ऋषि पंचमी
साल 2026 में पंचमी तिथि 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और 16 सितंबर को सुबह 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार ऋषि पंचमी का पर्व 15 सितंबर को मनाया जाएगा. पूजा का शुभ समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक रहेगा. इस दौरान सप्तऋषियों और अरुंधती माता की पूजा करना शुभ माना जाता है.
ऐसे करें ऋषि पंचमी की पूजा
इस दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ करें. चौकी पर सप्तऋषियों और अरुंधती माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें. इसके बाद कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि का गंगाजल या पंचामृत से अभिषेक करें. चंदन, अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित करें.
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पढ़ें ऋषि पंचमी की व्रत कथा
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, ऋषि पंचमी की कथा उत्तंक नाम के ब्राह्मण और उनकी पत्नी सुशीला से जुड़ी है. उनकी बेटी को पूर्व जन्म में रजस्वला अवस्था में नियमों का पालन न करने और ऋषि पंचमी का व्रत न करने का फल भुगतना पड़ा था. पिता को जब इसका कारण पता चला तो उन्होंने बेटी को ऋषि पंचमी का व्रत करने की सलाह दी. विधि-विधान से व्रत और पूजा करने के बााद उसके दुख दूर हुए और अगले जन्म में उसे सुख-सौभाग्य मिलने की मान्यता है.
सप्तऋषियों का करें स्मरण
ऋषि पंचमी पर सप्तऋषियों का स्मरण कर उनकी आरती करें और भगवान से जााने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें. पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप भी किया जाता है.
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोऽथ गौतमः।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः।।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत करने से मन को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि की कामनाा पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है.
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