Ravi Pradosh Vrat 2026: भगवान शिव की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत को बहुत शुभ माना जाता है. 26 जुलाई को पड़ने वाला रवि प्रदोष व्रत इस बार और भी खास रहने वाला है, क्योंकि इस दिन इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का सुंदर संयोग बन रहा है. मान्यता है कि इन शुभ योग में भगवान शिव की पूजा करने से अच्छे फल मिलते हैं और मन की इच्छाएं पूरी होने की संभावना बढ़ जाती है. अगर आप भी रवि प्रदोष व्रत रखने वाले हैं, तो पूजा का सही समय और इससे जुड़ी जरूरी बातें जरूर जान लें.
रवि प्रदोष व्रत का महत्व
रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है. ये व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक करने और पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है. साथ ही जीवन की कई परेशानियां भी धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं.
पूजा का सही समय
इस दिन प्रदोष पूजा का शुभ समय शाम 7:16 बजे से रात 9:21 बजे तक रहेगा. इसी समय भगवान शिव की पूजा करना सबसे अच्छा माना जाता है. कहा जाता है कि सही मुहूर्त में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए भक्त इसी समय पूजा करने की कोशिश करते हैं.

दो शुभ योग का मिलेगा लाभ
इस बार रवि प्रदोष व्रत पर इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग दोनों बन रहे हैं. इंद्र योग सूर्योदय से रात 10:05 बजे तक रहेगा. वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:34 बजे से अगले दिन सुबह 5:40 बजे तक रहेगा. सबसे अच्छी बात ये है कि प्रदोष पूजा के समय दोनों शुभ योग का असर रहेगा. इसलिए पूजा का महत्व और बढ़ जाता है.
शाम में ही क्यों होती है शिव पूजा
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में की जाती है. मान्यता है कि इसी समय भगवान शिव अपने भक्तों पर सबसे ज्यादा कृपा बरसाते हैं. इसलिए दिन की बजाय शाम को शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाया जाता है. इसके साथ ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप और शिव आरती करने से पूजा पूरी मानी जाती है.
व्रत करते समय रखें इन बातों का ध्यान
सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें. दिनभर सात्विक भोजन करें या अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखें. शाम को सही समय पर भगवान शिव की पूजा करें और पूजा के बाद प्रसाद जरूर बांटें. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और पूरे मन से की गई पूजा का शुभ फल जरूर मिलता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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