Som Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में व्रत और उपासना का विशेष महत्व है. इन्हीं में से एक अत्यंत पवित्र व्रत है प्रदोष व्रत. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है, जिसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. आज यानी 30 मार्च को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सोम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. वहीं, पूजा के बाद प्रदोष व्रत की कथा पढ़ना या सुनना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है. ऐसे में अगर आप भी आज सोम प्रदोष व्रत रखने वाले हैं, तो पूजा के बाद यहां से कथा पढ़ सकते हैं.
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प्रदोष व्रत की कथा | Pradosh Vrat Katha in Hindi
प्राचीन समय की बात है, एक निर्धन ब्राह्मणी अपने छोटे पुत्र के साथ अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही थी. वह प्रतिदिन भिक्षा मांगकर अपना और अपने बच्चे का पालन करती थी. एक दिन नदी के किनारे उसे एक असहाय बालक मिला, जो अकेला और दुखी था. दया से भरकर ब्राह्मणी बालक को अपने घर ले आई और अपने पुत्र के समान उसका पालन-पोषण करने लगी.
वास्तव में वह बालक विदर्भ का राजकुमार धर्मगुप्त था. शत्रुओं ने उसके माता-पिता की हत्या कर दी थी. ब्राह्मणी ने दोनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दी और एक दिन वह उन्हें लेकर एक महान ऋषि के आश्रम पहुंची. ऋषि ने अपनी दिव्य दृष्टि से उस बालक की सच्चाई जान ली और ब्राह्मणी को भगवान शिव की भक्ति करने तथा प्रदोष व्रत रखने का महत्व बताया.
ऋषि के उपदेश को स्वीकार कर ब्राह्मणी और दोनों बालकों ने पूरी श्रद्धा और नियम के साथ प्रदोष व्रत का पालन शुरू कर दिया. धीरे-धीरे उनके जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन होने लगे. दरिद्रता कम होने लगी और जीवन में सुख-शांति आने लगी. समय के साथ वह राजकुमार बड़ा हुआ और एक दिन वन में उसकी मुलाकात एक गंधर्व कन्या से हुई. दोनों के बीच प्रेम हुआ और भगवान शिव की कृपा से उनका विवाह संपन्न हुआ. बाद में गंधर्वों की सहायता से राजकुमार ने अपने शत्रुओं को परास्त कर अपना खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त कर लिया.
यह सब कुछ उस प्रदोष व्रत का ही फल था जो ब्राह्मणी और राजकुमार ने पूरी निष्ठा से किया था. भगवान शिव अपने भक्तों पर सदैव कृपा बरसाते हैं और उन्हें सुख, समृद्धि एवं शांति का आशीर्वाद देते हैं.
आज प्रदोष काल का समय | Pradosh kaal Timingप्रदोष व्रत में सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल माना जाता है, जो सूर्यास्त के बाद का होता है. पंचांग के अनुसार, आज प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त शाम 06:38 बजे से रात 08:57 बजे तक रहेगा. इस समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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