Som Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत जब सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. आज यानी 30 मार्च को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सोम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है. ऐसे में आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि, मंत्र, आज का शुभ मुहूर्त और प्रदोष काल का समय-
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
आज प्रदोष काल का समय | Pradosh kaal Timing
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 30 मार्च की सुबह 07:09 बजे से हो रही है और इसका समापन अगले दिन सुबह 06:55 बजे होगा. प्रदोष व्रत में सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल माना जाता है, जो सूर्यास्त के बाद का होता है. आज प्रदोष कालीन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:38 बजे से रात 08:57 बजे तक रहेगा. प्रदोष काल के समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है.
पूजा विधि | Som Pradosh Vrat Puja Vidhi- सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
- इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
- भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें.
- इसके बाद 11 या 21 बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल, सुपारी, लौंग, इलायची, फूल, धूप, दीप, गंध, चावल आदि नौवेघ अर्पित करें.
- पूजा के समय शक्कर और घी से बने मिष्ठान का भोग लगाया जाता है.
- इसके बाद शिव के मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें.
- प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें.
- दिनभर उपवास रखते हुए मन में शिव का स्मरण करें.
- शाम के समय पुनः स्नान करें और प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें.
ॐ नमः शिवाय
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः
ऊँ ऐं ह्रीं शिव-गौरीमय-ह्रीं ऐं ऊँ
ऊँ नमो धनदाय स्वाहा
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
प्रदोष स्तुति:शिवाय नमस्तुभ्यं प्रदोषं पूजितं मया। क्षमस्व अपराधं मे करुणासागर प्रभो॥
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. साथ ही यह व्रत चंद्र दोषों को कम करने और वैवाहिक जीवन में सुख लाने में भी सहायक माना जाता है.
शिवजी की आरती | Shiv Aartiॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव...
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव...
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव...
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव...
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता,
जगकर्ता जगभर्ता जग संहारकर्ता॥ ॐ जय शिव...
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर में शोभित यह त्रिवेद का टीका॥ ॐ जय शिव...
शिव ओंकारा शिव ओंकारा हर ऊंकारा,
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं