Pradosh Vrat in May 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष का व्रत काफी जरूरी माना जाता है और कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. ये व्रत सभी जरूरी व्रतों में से एक माना जाता है. यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि जो इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करता है उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
मई में कब है प्रदोष व्रत?
मई के महीने में दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं. पहला प्रदोष व्रत जो कि कृष्ण पक्ष में पड़ रहा है और वो 14 मई यानी की गुरुवार को है और दूसरा प्रदोष व्रत 28 मई 2026 को पड़ रहा है. इस दिन भी गुरुवार ही है. जैसा की ये दोनों व्रत गुरुवार को ही पड़ रहे हैं. इसलिए इन्हें गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा और इस दिन व्रत का महत्व और ज्यादा रहेगा.
प्रदोष काल का महत्व और पूजा विधि
प्रदोष व्रत में पूजा का शुभ समय शाम का होता है, जिसे प्रदोष काल कहते हैं. ऐसा कहा जाता है कि ये समय काफी अच्छा होता है. इस समय पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है. जब सूर्यास्त होता है, तो उसके डेढ़ घंटे पहले और बाद में पूजा का ज्यादा सही समय माना जाता है.
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इस दिन सुबह नहा कर पूजा करें और फिर दिन भर फलाहार का सेवन करें या तो उपवास रखें. शाम के समय में आप शिव जी के मंदिर जाए या फिर आपके घर में अगर शिवलिंग है, तो उसपर अभिषेक करें. साथ ही जल, दूध, शहद, गंगाजल, बेलपत्र और सफेद पुष्प चढ़ाएं. इसके बाद शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या प्रदोष व्रत कथा करें, ये काफी शुभ माना जाता है.
क्यों खास होता है प्रदोष व्रत?ज्योतिष शास्त्र की मानें, तो अगर प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन होता है तो ये ज्ञान, संतान सुख और आर्थिक हालात को सही करने वाला माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि अगर हम प्रदोष व्रत को छोड़ते नहीं है और सही तरीके से सब कुछ करते हैं, तो भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. साथ ही घर की आर्थिक स्थिति भी सुधर जाती है.
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