Khatu Shyam Nishan: खाटू श्यामजी राजस्थान के सीकर जिले में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है, जो पांडुपुत्र भीम के पौत्र बर्बरीक को समर्पित है. इन्हें 'हारे का सहारा' और 'शीश के दानी' के रूप में जाना जाता है, जिन्हें भगवान कृष्ण ने कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था. यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां फाल्गुन मेला मुख्य आकर्षण है. खाटू श्यामजी में निशान यात्रा आस्था और समर्पण का प्रतीक है, जिसे आमतौर पर रींगस से मंदिर लगभग 18 किमी तक पैदल ले जाया जाता है. चलिए आपको बताते हैं खाटू श्याम में निशान कैसे उठाएं और इसके क्या नियम हैं?
निशान क्या होता है?
निशान एक ध्वज (झंडा) होता है, जिसे बाबा श्याम के नाम पर सजाया जाता है. इसे लेकर भक्त पैदल यात्रा करते हुए खाटू श्याम मंदिर पहुंचते हैं और बाबा को अर्पित करते हैं. निशान आमतौर पर पीले, केसरिया या लाल रंग का होता है. उस पर श्याम बाबा का नाम या जय श्री श्याम लिखा होता है और बांस की लकड़ी पर निशान लगाया जाता है. निशान ले जाते समय नंगे पैर चलें, पवित्रता बनाए रखें और चलते समय कुछ भी न खाएं-पीएं ताकि ध्वज का अपमान न हो. यात्रा के दौरान 'श्याम बाबा की जय' के जयकारे लगाएं जाते हैं.
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निशान का महत्व
मान्यता है कि सच्चे मन और नियमों के साथ निशान उठाने से बाबा श्याम मनोवांछित फल देते हैं, कष्ट दूर होते हैं, मन को शांति और शक्ति मिलती है.
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निशान यात्रा का नियम और विधि
निशान उठाना- निशान को रींगस या रास्ते में किसी पवित्र स्थान से उठाएं. इसे उठाते समय और पदयात्रा के दौरान नंगे पैर रहना अनिवार्य माना जाता है.
पवित्रता- निशान धारण करने वाले को सात्विक रहना चाहिए. इसे हाथ में लेकर चलते हुए कुछ भी खाना या पीना वर्जित है.
सम्मान- निशान को बाबा श्याम के बलिदान का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे सम्मानपूर्वक और सीधा पकड़कर चलें.
दूरी- यात्रा लगभग 17-18 किलोमीटर की होती है, जिसे भक्त नाचते-गाते हुए पूरा करते हैं.
समर्पण- निशान चढ़ाना नकारात्मकता दूर करने और मन्नत पूरी होने की श्रद्धा का प्रतीक है.
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