विज्ञापन

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्यों बदलते हैं करवट? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में नींद के दौरान करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी कहा जाता है.

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्यों बदलते हैं करवट? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और कथा
परिवर्तिनी एकादशी
file photo

Parivartini Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, जिसे पद्मा या पार्श्व एकादशी भी कहते हैं. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है. हर महीने दो एकादशी व्रत रखे जाते हैं. सितंबर के महीने में दूसरी परिवर्तिनी एकादशी पड़ रही है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ व्रत रखने से सुख-समृद्धि के साथ खुशहाली आती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में नींद के दौरान करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी कहा जाता है. चलिए आपको बताते हैं परिवर्तिनी एकादशी में भगवान विष्णु के करवट बदलने की कथा क्या है और इसका धार्मिक मान्यता क्या है?

परिवर्तिनी एकादशी कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. परिवर्तिनी एकादशी को पार्श्व एकादशी, पद्मा एकादशी या वामन एकादशी भी कहा जाता है. इस बार परिवर्तिनी एकादशी पर भद्रा का साया भी रहने वाला है. 21 सितंबर को शाम 04 बजकर 30 मिनट पर प्रारंभ होगी और 22 सितंबर 2026 को शाम 06 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि मान्य होने के कारण एकादशी व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखना सही रहेगा.

परिवर्तिनी एकादशी व्रत का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन क्षीर सागर में योगनिद्रा में लेटे हुए भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है, जिससे ज्ञान और वैराग्य का वरदान मिलता है. इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है. इसके साथ ही जाने-अनजाने किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से घर में धन, आरोग्य और सकारात्मकता आती है.

परिवर्तिनी एकादशी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्य राज बलि ने अपने बल और तप से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था. इससे घबराकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास सहायता मांगने पहुंचे. देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने एक छोटे से ब्राह्मण यानी वामन का रूप धारण किया और राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे. वामन भगवान ने राजा बलि से केवल तीन पग (कदम) भूमि दान में मांगी. बलि ने अहंकार वश यह बात स्वीकार कर ली. इसके बाद भगवान ने अपना विराट रूप लिया. पहले पग में पृथ्वी और दूसरे पग में पूरा आकाश नाप लिया. तीसरा पग रखने के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा, तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में रख दिया. बलि की उदारता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया और यह वचन दिया कि उनकी एक प्रतिमा हमेशा पाताल लोक में राजा बलि के पास और दूसरी क्षीर सागर में रहेगी. इसी प्रसंग के बाद भाद्रपद शुक्ल एकादशी के दिन भगवान ने योगनिद्रा में करवट बदली थी.

यह भी पढ़ें:-  Ganesh Visarjan 2026: गणेश विसर्जन कब और कैसे करें, जानिए नियम, शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि 

यह भी पढ़ें:- पितृपक्ष में गयाजी में पिंडदान का क्यों किया जाता है? जानिए महत्व और कारण

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Parivartini Ekadashi, Ekadashi, Faith
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com