आज यानी 25 जून, गुरुवार को निर्जला एकादशी का व्रत रखा गया. साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं. हालांकि, मान्यता है कि केवल एक निर्जला एकादशी का उपवास रखने से सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है. ऐसे में भक्त सच्ची श्रद्धा और भक्तिभाव से निर्जला एकादशी का व्रत रख पु्ण्य फल प्राप्ति की कामना करते हैं. हालांकि, केवल व्रत रखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता. शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण सही समय और विधि से किया जाए. इसलिए निर्जला एकादशी के बाद द्वादशी तिथि में व्रत खोलने का विशेष महत्व है.
कब किया जाएगा निर्जला एकादशी व्रत का पारण?
पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026, शुक्रवार को किया जाएगा. पारण के लिए शुभ समय प्रातः 5 बजकर 49 मिनट से सुबह 9 बजकर 3 मिनट तक रहेगा. वहीं, द्वादशी तिथि का समापन शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के अंदर ही करना चाहिए.
कैसे करें व्रत का पारण?- पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना करें.
- पूजा में तुलसी दल जरूर अर्पित करें, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं.
- भक्तिभाव से भगवान का स्मरण करने के बाद व्रत खोलने की प्रक्रिया शुरू करें.
- सबसे पहले जल ग्रहण करके या तुलसी पत्र का सेवन करके व्रत का पारण किया जाता है.
- इसके बाद हल्का, सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए.
पारण के दिन तामसिक भोजन और क्रोध जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना शुभ माना जाता है. इसके अलावा व्रत का पारण करने के बाद आप जरूरतमंदों में भोजन और वस्त्र का दान भी कर सकते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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