Maheshwari Mahesh Navami Kab hai: सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी के पर्व के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के महेश या फिर कहें महेश्वर स्वरूप की पूजा की जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार यह पर्व उस माहेश्वरी समाज से जुड़ा हुआ है, जिसकी वंशोत्पत्ति भगवान महेश के आशीर्वाद से हुई थी. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव के आशीर्वाद से 72 क्षत्रिय को पुनर्जीवन मिला और उनसे माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई. यही कारण है कि इस पावन पर्व को माहेश्वरी समाज अपनी वंशोत्पत्ति का दिन मानते हुए बहुत ही भव्य तरीके से मनाता है. आइए महेश नवमी की पूजा विधि, मंत्र और महत्व को विस्तार से जानते हैं.
महेश नवमी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार जिस ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी का पर्व मनाया जाता है, वह 22 जून 2026, सोमवार को दोपहर 03:39 बजे प्रारंभ होकर आज 23 जून 2026, मंगलवार की शाम को 04:39 बजे रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर आज ही यह पावन महेश नवमी का पर्व मनाया जाएगा.
महेश नवमी की पूजा विधि
आज महेश नवमी पर साधक को स्नान-ध्यान करने के बाद सबसे पहले भगवान शिव के महेश्वर स्वरूप का ध्यान करते हुए इस पावन व्रत और पूजा को विधि-विधानसे करने का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद अपने घर के ईशान कोण में एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र को स्थापित करके विधि-पूर्वक पूजा करें. यदि आप शिवालय में शिव पूजा करने जा रहे हैं तो सबसे पहले वहां पर तांबे के लोटे से गंगाजल चढ़ाएं.
इसके बाद भगवान शिव को दूध, दही, शहद, चंदन, पुष्प, अक्षत, शमीपत्र, बेलपत्र, धतूरा, फल, मिष्ठान आदि अर्पित करें. भगवान शिव और माता पार्वती की यह पूजा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करें. यह भगवान शिव की सामान्य पूजा पद्धति है, आप चाहें तो अपने क्षेत्र या लोकपरंपरा के अनुसार इसमें चीजें जोड़ सकते हैं. भगवान शिव की पूजा के अंत में आरती करना बिल्कुल न भूलें.
महेश नवमी की पूजा का मंत्र
महेश नवमी पर भगवान शिव के महेश्वर स्वरूप की पूजा का महत्व माना गया है. ऐसे में आज भगवान शिव की पूजा में विशेष रूप से 'ॐ महेश्वराय नम:' मंत्र को रुद्राक्ष की माला से अधिक से अधिक जपें. इसके अलावा आप अपनी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार 'ॐ पार्वतीपतये नमः' मंत्र का जप अथवा उनके स्तोत्र, चालीसा आदि का पाठ भी कर सकते हैं.
महेश नवमी का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव कल्याण के देवता हैं और महेश नवमी के दिन जो कोई साधक उनकी सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है, वे उस पर कृपायमान होकर सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. शिव कृपा से उसे जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है. चूंकि महेश्वरी समाज की वंशोत्पत्ति भगवान शिव के आशीर्वाद से हुई थी, इसलिए इस समाज से जुड़े लोग अपने कुल की वृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए इस दिन महादेव और माता पार्वती की दिव्य तरीके से पूजा करते हैं. महेश्वरी समाज का मानना है कि भगवान महेश की साधना-आराधना करने से उनके सभी दुखों का अंत हो जाता है और जीवन में हमेशा सुख-सौभाग्य बना रहता है.
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