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Kedarnath Jyotirlinga: किसने बनवाया था केदारनाथ मंदिर? जानें इसका महाभारत काल से क्या है कनेक्शन?

Kedarnath Jyotirlinga Story: सनातन परंपरा में भगवान शिव की उपासना करने वाले हर साधक की कामना होती है कि वह अपने जीवन में एक बार द्वादश ज्यो​तिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम के दर्शन और पूजन के लिए जरूर जाए. शिव भक्तों की आस्था के केंद्र का निर्माण कब और कैसे हुआ था? शिव के पांचवे ज्योतिर्लिंग की पूजा का क्या है धार्मिक महत्व, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. 

Kedarnath Jyotirlinga: किसने बनवाया था केदारनाथ मंदिर? जानें इसका महाभारत काल से क्या है कनेक्शन?
Kedarnath Jyotirlinga: केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी
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Kedarnath Jyotirlinga Ka Mandir Kisne Banwaya Tha:  भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम उत्तराखण्ड राज्य में स्थित है. हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच स्थित इस पावन शिव धाम के दर्शन हर शिव भक्त अपने जीवन में एक बार जरूर करना चाहता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार महादेव के इस महाधाम का संबंध नर-नारायण और पांडवों से जुड़ा है. इस दिव्य ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति के सारे कष्ट और दोष दूर तथा कामनाएं पूरी हो जाती हैं. आइए त्रिकोण के आकार वाले शिव के पांचवें ज्योतिर्लिंग से जुड़े रहस्य और इसकी पूजा के धार्मिक महत्व को विस्तार से जानते हैं. 

बैल की पीठ के आकार का क्यों है यह ज्योतिर्लिंग 

Facebook@Mahakaleshwar Daily Darshan

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भगवान शिव के पावन ज्यो​तिर्लिंग को महाभारत काल के समय पांडवों की एक कथा से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया तो पांडव अपने ऊपर लगे भाईयों की हत्या के पाप से चिंतित थे. जिसे दूर करने के लिए वे देवों के देव महादेव का आशीर्वाद पाना चाहते थे. भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए पांडवों ने काशी से लेकर हिमालय तक की यात्रा कर डाली, लेकिन महादेव का उन्हें दर्शन नहीं हुआ क्योंकि भगवान शिव खुद उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे.

पांडव जैसे ही किसी शिव धाम पर पहुंचते, भगवान शंकर वहां से कहीं और चले जाते. मान्यता है कि हिमालय में जब पांडवों ने शिव को ढूढ़ लिया तो महादेव ने वहां से भी बैल का रूप धारण करके जाने लगे, लेकिन भीम ने उन्हें लपक कर पकड़ लिया. बावजूद इसके भीम के हाथ में बैल रूपी का सिर्फ कूबड़ हाथ में आया. मान्यता है कि पांडवों की भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने अंतत: उन्हें पापमुक्त कर दिया और उसी स्थान पर केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गये.

नर और नारायण से जुड़ी कथा 

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मान्यता है कि प्राचीन काल में हिमालय में नर और नारायण नाम के ​शिव भक्त प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग का का पूजन किया करते थे. एक दिन उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा. इस पर नर और नारायण ने उनसे उसी स्थान पर निवास करने के लिए प्रार्थना की. मान्यता है कि इसके बाद भगवान शिव उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रतिष्ठित हो गये और तब से लेकर आज तक वहां पर केदारेश्वर के नाम से पूजे जाते हैं. 

केदारनाथ धाम से जुड़ी रोचक बातें 

  • मान्यता है कि महाभारत काल में जिस केदारनाथ मंदिर को पांडवों ने बनवाया था, वह लभगत 400 साल हिमालय में बर्फ के नीचे दबा रहा. इस पावन शिव धाम जीर्णोद्धार बाद में आदि शंकराचार्य ने करवाया था.

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  • बाबा केदारनाथ धाम के पट भक्तों के दर्शन के लिए छह महीने खुले और छह महीने बंद रहते हैं. सर्दियों के समय जब कार्तिक पूर्णिमा पर केदारनाथ धाम की चल प्रतिमा को उखीमठ लाया जाता है, उस समय इस मंदिर में एक दीया जलाया जाता है, जो पट बंद होने के बाद पूरे छह महीने लगातार जलता रहता है. 
  • केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे एक पवित्र शिला जिसने 2013 में आए जल प्रलय के समय इस पावन धाम की रक्षा की थी. महादेव के इस पावन धाम में इसे भीम शिला के नाम से पूजा जाता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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