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Jyeshtha Adhik Purnima 2026: ज्ये​ष्ठ अधिक पूर्णिमा कब है? जानें पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा की पूजा विधि, महत्व और महाउपाय

Adhik Maas Ki Purnima Kab Hai: सनातन परंपरा में प्रत्येक मास के शुक्लपक्ष मास की पंद्रहवीं तिथि को पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है जो जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु और मन के कारक माने जाने वाले चंद्र देवता को समर्पित है. ज्येष्ठ मास में पूर्णिमा कब पड़ेगी? पुरुषोत्तम मास में पड़ने पर इसका क्या महत्व होता है, जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

Jyeshtha Adhik Purnima 2026: ज्ये​ष्ठ अधिक पूर्णिमा कब है? जानें पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा की पूजा विधि, महत्व और महाउपाय
Jyeshtha Adhik Maas Purnima 2026: अधिक मास की पूर्णिमा कब है?
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Jyeshtha Purnima 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में किसी भी मास के शुक्लपक्ष में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपने पूरे आकार और तेज को लिए होता है. इस पावन तिथि पर चंद्र देवता और भगवान श्री विष्णु की विधि-विधान से पूजन एवं दर्शन करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. इस पूजन का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब यह पावन तिथि पुरुषोत्तममास या फिर कहें अधिक मास में पड़ती है. आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ या फिर कहें जेठ महीने की पूर्णिमा कब पड़ेगी? इसकी पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व क्या है? साथ ही यह भी कि पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर किस उपाय से पूरी होगी आपकी मनोकामना?

कब है अधिक मास की पूर्णिमा?

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पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा ​तिथि 30 मई 2026, शनिवार के दिन सुबह 11:57 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02:14 बजे तक रहेगी. ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का व्रत 30 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा तो वहीं स्नान-दान की अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार के दिन रहेगी. ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम के समय 07:36 बजे होगा. 

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की पूजा विधि

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हिंदू मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठकर गंगा या फिर किसी अन्य पवित्र जलतीर्थ पर जाकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद पूरे विधि-विधान से भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी के मंदिर में जाकर दर्शन और विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर भगवान श्री लक्ष्मीनारायण से मनचाहा आशीर्वाद पाने के लिए साधक को व्रत, पूजन और कथा का पाठ करना चाहिए. व्रत वाले दिन साधक को भूलकर भी अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए और पूरे दिन फलाहार करना चाहिए. श्री हरि की पूजा का पूरा पुण्यफल पाने के लिए इस दिन उनके मंत्र का जप और पूजा के अंत में आरती करना बिल्कुल न भूलें. 

ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा का उपाय

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हिंदू मानन्यता के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की साधना के साथ केले और तुलसी की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए. इसके अलावा ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति लोगों को अन्न, वस्त्र और धन आदि का दान करना चाहिए. पौराणिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर पीपल, वट, गूलर, केला, तुलसी, अशोक, बेल आदि का पौधा लगाने पर भी अत्यधिक पुण्यफल प्राप्त होता है. 

पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की पूर्णिमा का महत्व

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हिंदू मान्यता के अनुसार जिस पूर्णिमा तिथि को भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की साधना-आराधना के लिए अत्यंत ही शुभ और पुण्यदायी माना गया है, वह जब अधिक मास या फिर कहें पुरुषोत्तम मास में पड़ती है तो वह कई गुना अधिक फलदायी हो जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार अधिक मास की पूर्णिमा पर किसी जल तीर्थ पर स्नान-दान और श्री हरि की विधि-विधान से साधना करने पर साधक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और पूरे साल उस पर श्री हरि के साथ माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.

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