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क्या रात डेढ़ बजे जलेगी होलिका? भद्रा और सूतक के बीच फंसी होली 2026 की घड़ी!

रंगों से पहले होलिका दहन (अग्नि) की रस्म...लेकिन इस बार वक्त को लेकर हल्की सी कशमकश है. कहीं सूतक का साया, तो कहीं रात के डेढ़ बजे का खास मुहूर्त. आखिर सही समय क्या है? जानिए पूरी जानकारी तफसील से...

क्या रात डेढ़ बजे जलेगी होलिका? भद्रा और सूतक के बीच फंसी होली 2026 की घड़ी!
जानें भद्रा काल के बाद ही क्यों करें होलिका दहन?, ये है पूरी टाइमिंग

Holika Dahan Timing: रात गहरी होगी, गलियों में सन्नाटा होगा और अचानक कहीं लकड़ियों के ढेर से उठेंगी आग की लपटें, लेकिन इस बार मामला बस रस्म का नहीं, वक्त की नजाकत का है. सूतक का साया, भद्रा का पहरा और आधी रात का खास मुहूर्त...आखिर होलिका दहन का सही समय कौन सा है? यही सवाल लोगों के जहन में घूम रहा है. जानिए पूरी सटीक जानकारी ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित से...

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मुहूर्त को लेकर क्यों हो रही है हलचल (Muhurat Timing Confusion Explained)

दरअसल, स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक कुछ शहरों में 3 तारीख की सुबह सूतक लगने से पहले तक भी होलिका दहन किया जाएगा. इसी वजह से लोगों में हल्की सी उलझन है कि सही वक्त कौन सा है. ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, रात्रि में भद्रा का प्रभाव कुछ समय के लिए रहेगा, लेकिन भद्रा समाप्ति के बाद रात करीब 1:30 बजे से 2:30 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए एक मान्य मुहूर्त माना जा रहा है.

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भद्रा और सूतक का क्या है मामला (Bhadra and Sutak Significance)

हिंदू पंचांग के अनुसार, भद्रा काल में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है, इसलिए Holika Dahan Bhadra Kaal, Holika Dahan 2026 timing जैसे सवाल उठ रहे हैं. अगर भद्रा रात्रि में खत्म हो जाती है, तो उसके बाद किया गया दहन शुभ माना जाता है. वहीं सूतक का संबंध ग्रहण या अशुभ खगोलीय स्थिति से जोड़ा जाता है. अगर 3 तारीख की सुबह सूतक लग रहा है, तो उससे पहले रात में ही दहन करना बेहतर माना जा रहा है. यही वजह है कि कई शहरों में देर रात की तैयारी की जा रही है.

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क्यों जरूरी है सही मुहूर्त जानना (Why Correct Muhurat Matters)

होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की रस्म भी है. लोग चाहते हैं कि पूजा सही समय पर हो, ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे. आखिर में यही समझना जरूरी है कि स्थानीय पंचांग और विद्वान ज्योतिषियों की सलाह के अनुसार निर्णय लें. अलग-अलग शहरों में समय में थोड़ा फर्क हो सकता है. इस बार होलिका दहन का रंग सिर्फ आग का नहीं, बल्कि वक्त की नजाकत का भी है. सही मुहूर्त जानकर ही इस पावन रस्म को अंजाम दें, ताकि त्योहार की रौनक में कोई कमी न रहे.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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