भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हरछठ यानी हलषष्ठी व्रत इस साल 2 सितंबर बुधवार को रखा जाएगा. यह व्रत जन्माष्टमी से दो दिन पहले होता है और भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित माना जाता है. संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से महिलाएं इस दिन व्रत करती हैं. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपती भी श्रद्धा के साथ यह व्रत कर सकते हैं.
हरछठ व्रत में क्या खाना होता है मना
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि हरछठ का व्रत अपने खान-पान के नियमों की वजह से थोड़ा कठिन माना जाता है. इस दिन हल से जुती जमीन में पैदा होने वाली चीजों का सेवन नहीं किया जाता है. तालाब या पानी के किनारे उगने वाले मखाने और सिंघाड़े का सेवन किया जा सकता है. मान्यता के अनुसार, हल भगवान बलराम का शस्त्र है, इसलिए व्रत में हल से जुड़ी उपज से दूरी रखी जाती है.
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छठी माता की होती है पूजा
बता दें कि हरछठ के दिन छठी माता की पूजा करने की परंपरा है. घर में गोबर से छठी मैय्या की आकृति बनाई जाती है और उन्हें सात अनाज का भोग लगाया जाता है. इसमें जौ, मक्का, धान, गेहूं, चना, मूंग, सेमी और अरहर दाल शामिल की जाती है.
2 सितंबर को ही क्यों रखा जाएगा व्रत
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि षष्ठी तिथि 2 सितंबर सुबह 6:12 बजे शुरू होकर 3 सितंबर सुबह 4:25 बजे तक रहेगी. सूर्योदय के आधार पर व्रत 2 सितंबर को रखा जाएगा. इस दिन ध्रुव योग रात 9:12 बजे तक रहेगा. यही वजह है कि इस साल हरछठ व्रत 2 सितंबर को मनाया जाएगा.
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