Brihaspati Ka Kark Rashi Me Gochar: ज्योतिष शास्त्र में जिस गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, उच्च शिक्षा, संतान, सौभाग्य आदि का कारक माना जाता है वह पूरे 12 साल बाद आज 2 जून 2026, मंगलवार को अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवताओं के गुरु कहलाने वाले बृहस्पति का यह राशि परिवर्तन हमेशा देश-दुनिया में बड़े बदलाव का कारण बना है. ऐसे में आज गुरु ग्रह का कर्क राशि में गोचर भारत समेत दुनिया के अन्य देशों की राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर क्या कुछ असर डालने जा रहा है, आइए इसे जाने-माने ज्योतिषविद् पं. कृष्ण गोपाल मिश्र से विस्तार से जानते हैं.
बृहस्पति के राशि परिवर्तन का कैसा पड़ेगा असर?
आज 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति 12 साल बाद अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर गये हैं. ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी का सार्वभौमिक लग्न एवं राशि वृषभ को माना गया है. खास बात ये कि वृषभ राशि से तीसरे बृहस्पति का गोचर होगा. ज्योतिष में 3,6,8 और 12 वां घर को खराब माना गया है. साथ ही कालपुरुष में बृहस्पति का गोचर चौथे होगा. तीसरा घर अपने आसपास का वातावरण प्रतिनिधित्व करता है. चौथा घर स्वयं के घर का प्रतिनिधित्व करता है. इस हिसाब से देखा जाए तो बृहस्पति जब भी मिथुन राशि से कर्क राशि की ओर बढ़ता है तो दुनिया में कुछ बड़े बदलाव और तनाव देखने को मिलता रहा है.
बड़े बदलाव का कारण बनेगा गुरु का गोचर!
बृहस्पति ने जब 20 जुलाई 1990 को कर्क राशि में प्रवेश किया था, तब सोवियत संघ का विघटन, खाड़ी युद्ध, भारत में धार्मिक आधार पर आध्यात्मिक आंदोलन का विस्तार, मंडल-कमंडल कानून का विरोध, सरकार की अस्थिरता जैसी घटनाएं देखने को मिली थीं. इसी प्रकार साल 2003 में जब 26 अगस्त को बृहस्पति ने जब कर्क राशि में प्रवेश किया तो इराक युद्ध, हिंद महासागर में सुनामी, यूरोपीय संघ का विस्तार, कोलंबिया स्पेस शटल दुर्घटना, SARS महामारी और यूरोप अमेरिका में भीषण गर्मी देखने को मिली थी. 19 जून 2014 को जब बृहस्पति कर्क में प्रवेश किया तो ISIS आतंकी संगठन का उदय और बढ़ता दबदबा, मलेशिया एयरलाइंस MH370 का रहस्यमय ढंग से लापता होना, यूक्रेन संकट, इबोला महामारी, भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन और दिल्ली में राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिला था.

क्या मंडल-कमंडल और खाड़ी युद्ध जैसे हालात फिर बनेंगे?
बीते साल 14 मई 2025 में जब से बृहस्पति मिथुन राशि में आया और 6 अगस्त 2025 के बाद इसने पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर किया. इसके बाद एक बार फिर अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच में बृहस्पति कर्क राशि प्रवेश कर वापस मिथुन राशि में आ गया था. कहने का मतलब यह कि मिथुन राशि के अंतिम नक्षत्र एवं कर्क राशि में बृहस्पति का गोचर, उपरोक्त दोनों ही स्थितियां हमेशा खराब ही रहीं. इस बार भी अगर अगस्त से देखा जाए तो भारत पर विदेशी नीतियों का दबाव, कभी टैरिफ का दबाव, कभी तेल संकट, इसी बीच में देखा जाए तो फिर से एक बार खाड़ी युद्ध जैसा ही अमेरिका और ईरान के बीच में जबरदस्त युद्ध देखने को मिला. जिससे तेल संकट, विदेशी आयात पर संकट और मंडल-2 की तरह यूजीसी कानून आया जो अभी सुप्रीम कोर्ट के वजह से स्टे पर लटका हुआ है. अगर गौर करें तो बीते एक साल यानि अगस्त 2025 के बाद से ही हिंदुत्व और धार्मिक आधार पर राजनीति भी तेज हो गई है.
अमेरिका-ईरान युद्ध पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
अभी जून के महीने में 19 जून तक बृहस्पति पुनर्वसु नक्षत्र में ही रहेगा तब तक ईरान और अमेरिका का संकट या अमेरिका ईरान एवं इजरायल के बीच में तनाव बना रहेगा. इस उपरोक्त समय में विदेशी नीति को लेकर के भारत पर बड़ा दबाव होगा. विदेशी मुद्रा को लेकर के भी भारत पर दबाव बना हुआ है. और जिस तरीके से 1990-91 में विश्व बाजार में संकट था और देश में भी आर्थिक संकट था उसी प्रकार से इस समय में भी बाजार का संकट दिखाई दे रहा है.
तब बढ़ सकती है महामारी और दुर्घटना की आशंका
बृहस्पति 2 जून 2026 को कर्क राशि में प्रवेश करके 24 जून 2027 तक कर्क राशि में रहेगा. इसमें बीच में 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 के बीच में बृहस्पति अतिचारी होकर के सिंह राशि में गोचर करेंगे. इस सिंह राशि में ही 13 नवंबर 2025 से 5 दिसंबर 2025 के बीच में बृहस्पति, मंगल और केतु एक साथ सिंह राशि में होंगे. 31 अक्टूबर 2026 के बाद से ही बृहस्पति और केतु एक साथ हो जाएंगे. 13 नवंबर 2026 से 5 दिसंबर 2026 के बीच में बृहस्पति केतु एवं मंगल की युति किसी बड़े महामारी के फैलने का संकेत दे रहा है.
इसी प्रकार 25 जनवरी 2027 से 25 अप्रैल 2027 के बीच में बृहस्पति और केतु एक कर्क राशि में होंगे इस समय में विशेषकर 10 मार्च 2027 से 25 अप्रैल 2027 के बीच में जब बृहस्पति केतु एवं मंगल तीनों कर्क राशि में गोचर करेंगे उसे समय में किसी बड़े महामारी के संकेत है. उपरोक्त 13 नवंबर 2026 से 5 दिसंबर 2026 के बीच में हवाई दुर्घटना के भी योग बन रहे हैं क्योंकि कल पुरुष के आधार पर पंचम भाव में बृहस्पति केतु मंगल होंगे और 12 वें में शनि होंगे. जिस पर मंगल की अष्टम दृष्टि पड़ेगी. यह योग हवाई दुर्घटना का संकेत देता है. साथ ही साथ इस उपरोक्त समय में प्राकृतिक आपदाएं और साथ ही साथ धार्मिक आधार पर उन्माद देखने को मिलेगा.

राजनीति में तब कुछ ऐसी मचेगी हलचल
गुरु गोचर के राजनीति पर पड़ने वाले प्रभाव की बात करें तो 13 नवंबर 2026 से 5 दिसंबर 2026 के बीच में एवं 25 जनवरी से 25 अप्रैल के बीच में राजनीतिक उथल-पुथल, तनाव, सरकार के खिलाफ विपक्ष का एकजुट होना और विभिन्न प्रकार के आंदोलन देखने को मिल सकते हैं. इस दौरान देश में आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. उपरोक्त दोनों समय में पश्चिम दक्षिण एशिया में फिर से युद्ध के संकट मंडराएंगे. और भीषण युद्ध भी हो सकता है. 28 मार्च में शनि का परिवर्तन होगा. उसके बाद कर्क राशि में बृहस्पति केतु एवं मंगल की स्थिति काफी मजबूत और आक्रामक होगी. इस बीच किसी बड़े नेता पर संकट मंडराएंगा. बड़े नेता की मृत्यु होने की भी आशंका है. राजनीति में अचानक से कोई बड़ा परिवर्तन संभव है. आतंकी घटनाएं घट सकती हैं. विश्व शक्ति का केंद्र बदल सकता है. इस दौरान विश्व में अपने वर्चस्व को बनाए रखने की लड़ाई देखने को मिलेगी.
किन चीजों के लिए गुडलक साबित होगा गुरु का गोचर
उच्च के बृहस्पति से सकारात्मक बात यह जरूर दिखाई दे रही है धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना बढ़ेगी. हिंदुत्व में मजबूती आती नजर आएंगी. लोक कल्याण की योजनाएं लागू होगी. एक तरह से कहा जा सकता है कि करके बृहस्पति एक तरह का वातावरण को चेंज करता है. एक तरह की व्यवस्थाओं में विशेष परिवर्तन करता है. सत्ता में बदलाव करता है और ने आयाम बनता है. इन सब बदलाव के बाद जो भी सकारात्मक देखने को मिलेगा और वह आगे भविष्य के लिए काफी अच्छा होगा. जैसे की 1990-91 में देश में आर्थिक उदार नीति अपनाई गई थी, जिसे आगे परिणाम काफी अच्छा रहा. 2003 में देश में मोबाइल क्रांति, आई. टी. बड़ा क्रांति का समय शुरू हुआ और विश्व का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला.
इसी प्रकार 2014 में स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, प्रधानमंत्री जनधन योजना, स्किल इंडिया, रोलर और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार योजना आदि महत्वपूर्ण सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला. कुछ इसी तरह बृहस्पति के कर्क राशि में गोचर करने के बाद भारत नए डिजिटल क्रांति की तरफ आगे बढ़ेगा. AI का प्रभुत्व देखने को मिलेगा. AI से दुनिया में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. दुनिया एक नए युग की तरफ बढ़ती हुई नजर आएगी. जून 2027 के उपरोक्त सारे परिवर्तन और उथल-पुथल या तनाव के बाद जो बचा होगा, वह एक नया सकारात्मक क्रांति की ओर ले जाएगा जो देश को एक नई विकास और ऊंचाइयों की तरफ ले जाएगा.
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