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Gita Secrets: क्या आपमें भी है ये 3 बुरी आदतें? गीता में श्रीकृष्ण ने बताया इन्हें 'नरक का द्वार', जानिए...

Bhagavad Gita Secrets: श्रीमद भगवद गीता के 16वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने काम, क्रोध और लोभ को 'नरक का द्वार' बताया है. गीता में इन तीनों आदतों का उल्लेख है. जानिए ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय से इसका सरल अर्थ और महत्व...

Gita Secrets: क्या आपमें भी है ये 3 बुरी आदतें? गीता में श्रीकृष्ण ने बताया इन्हें 'नरक का द्वार', जानिए...
भगवान श्रीकृष्ण ने इंसान के पतन का सबसे बड़ा कारण 'नरक का द्वार' बताया
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श्रीमद भगवद गीता केवल आध्यात्मिक ज्ञान का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली अमूल्य सीख भी देती है. गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ऐसे कई सूत्र बताए हैं, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, गीता में तीन ऐसी आदतों का उल्लेख है, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने इंसान के पतन का सबसे बड़ा कारण और 'नरक का द्वार' बताया है.

बेलगाम इच्छाएं बनती हैं कारण

ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि इच्छाएं होना स्वाभाविक है, लेकिन जब वे जरूरत से बढ़कर लालसा बन जाएं तो इंसान सही और गलत का फर्क भूलने लगता है. यही स्थिति जीवन में दुख और असंतोष का कारण बनती है.

क्रोध छीन लेता है सही फैसला लेने की शक्ति

गीता के अनुसार, गुस्सा इंसान की बुद्धि को भ्रमित कर देता है. क्रोध में लिया गया एक फैसला रिश्तों, करियर और सम्मान को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए संयम और धैर्य को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है.

लालच कभी नहीं देता सच्चा सुख

पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, लोभ इंसान को हमेशा 'और चाहिए' की दौड़ में लगाए रखता है. चाहे कितना भी धन या सफलता मिल जाए, लालच कभी खत्म नहीं होता और मन की शांति छीन लेता है.

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गीता के इस अध्याय में मिलता है उल्लेख

इन तीनों दोषों का वर्णन श्रीमद्भगवद्गीता के 16वें अध्याय 'दैवासुरसम्पद्विभागयोग' के श्लोक 21 में मिलता है. "त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मन: | काम: क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ||". इसमें भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि काम, क्रोध और लोभ आत्मा के पतन के तीन द्वार हैं. इसलिए इनका त्याग करना ही कल्याण का मार्ग है.

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क्या है श्रीकृष्ण का संदेश

भगवान श्रीकृष्ण का संदेश स्पष्ट है कि जो व्यक्ति काम, क्रोध और लोभ पर नियंत्रण कर लेता है. वही जीवन में सच्ची शांति, सुख और आत्मिक उन्नति प्राप्त करता है. गीता की यह सीख आज के दौर में भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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