Yogini Ekadashi 2026 Date for Smart and Vaishnav: सनातन परंपरा में प्रत्येक मास में दो बार और साल भर में 24 बार पड़ने वाली एकादशी तिथि को अत्यंत ही पुण्यदायी माना गया है क्योंकि यह पावन तिथि सारे जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है. श्री हरि की कृपा बरसाने वाली इस पावन तिथि का महत्व तब और भी अधिक बढ़ जाता है, जब यह आषाढ़ मास में पड़ती है और इसे योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. पंचांग के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत स्मार्त और वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग कब रखेंगे और क्या है इसका धार्मिक महत्व, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
स्मार्त और वैष्णव कब मनाएंगे एकादशी व्रत

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत (Sanskrit) विश्वविद्यालय के पौरोहित विभाग के प्रोफेसर रामराज उपाध्याय के अनुसार जो वैष्णव से इतर हैं, वे स्मार्त हैं. इसका संबंध गृहस्थों से है. पंचांग के अनुसार योगिनी एकादशी व्रत 10 और 11 जुलाई 2026 को रखा जाएगा. स्मार्त जहां आज 10 जुलाई को इस व्रत को रखेंगे, वहीं वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग परविद्धा तिथि को स्वीकार करते हुए कल इस व्रत को विधि-विधान से करेंगे. अर्थात कल 11 जुलाई को एकादशी तिथि थोड़ी और द्वादशी तिथि पूरी मिलेगी, जबकि आज 10 जुलाई को एकादशी तिथि ज्यादा रहेगी.
इस्कॉन वृंदावन से जुड़े सुरपतिदास जी कहते हैं कि आज एकादशी दिन भर तो है लेकिन उदया तिथि में नहीं है, लेकिन कल 11 जुलाई 2026 को सूर्योदय के समय एकादशी रहेगी और उसके बाद पूरे दिन द्वादशी तिथि रहेगी. चूंकि इस्कॉन और वैष्णव परंपरा से जुड़े तमाम लोग जैसे गौड़ीय, निम्बार्क, रामानुज संप्रदाय आदि द्वादशी युक्त एकादशी व्रत रखते हैं, इसलिए योगिनी एकादशी का व्रत वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग 11 जुलाई 2026, शनिवार के दिन ही रखेंगे.

योगिनी एकादशी व्रत : 10 जुलाई 10, 2026
योगिनी एकादशी व्रत के पारण की तिथि एवं समय : 11 जुलाई 2026 को दोपहर 01:50 से लेकर सायंकाल 04:36 बजे तक
नोट: पारण तिथि वाले दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - प्रात:काल 10:32 बजे.
योगिनी एकादशी व्रत : 11 जुलाई 10, 2026
योगिनी एकादशी व्रत के पारण की तिथि एवं समय : 12 जुलाई 2026 को प्रात:काल 05:32 से लेकर 08:18 बजे तक
नोट: पारण वाले दिन द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी.
योगिनी एकादशी व्रत का पुण्यफल
इस्कॉन भारत के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर व्रजेन्द्र नंदन दास के सनातन परंपरा में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर पड़ने वाले योगिनी एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा महात्मय माना गया है. इस व्रत को विधि-विधान से करने पर व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गये संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं और वह भगवान विष्णु की कृपा से सभी सुखों को भोगता हुआ अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है. पद्म पुराण के अनुसार योगिनी एकादशी व्रत को करने वाले साधक को 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य लाभ प्राप्त होता है.
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