Maa Ganga Aarti: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला 'गंगा दशहरा' सनातन परंपरा में एक महत्वपूर्ण पर्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन मां गंगा का अवतरण 'स्वर्ग' से धरती पर हुआ था. दिल्ली से लेकर हरिद्वार और काशी तक, आज के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा तटों पर उमड़ती है. आस्था और श्रद्धा से भरे इस दिन, गंगा स्नान और पूजन का विशेष फल बताया गया है, लेकिन क्या आपको पता है गंगा दशहरा पर कौन सी आरती की जाती है?

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कैसे करें गंगा पूजन (Ganga Dussehra Pujan Vidhi)
गंगा दशहरा पर केवल डुबकी लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि विधि-विधान से पूजा करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यदि आप घर पर हैं या गंगा तट पर, तो आप इस सरल प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं.
- संकल्प और स्नान: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा जल मिले जल से स्नान करें, या फिर गंगा नदी स्नान करते समय 'ॐ नम: शिवायै नारायण्यै दशहाराय गंगायै नम:' मंत्र का जाप करें.
- पूजन सामग्री: भगवान श्री हरि विष्णु और मां गंगा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. पूजा में धूप, दीप, गंध, पुष्प, नैवेद्य और चंदन का उपयोग करें.
- अर्घ्य देना: गंगा नदी में तांबे के लोटे से अर्घ्य दें और मां गंगा से अपने पापों के शमन की प्रार्थना करें.

गंगा दशहरा पर क्या करें? (What to do on Ganga Dussehra)
गंगा दशहरा की शाम का दृश्य अलौकिक होता है. यदि आप आरती करना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:-
- आरती की विधि: पांच बत्तियों वाले दीपक (पंचप्रदीप) से आरती करना सबसे शुभ माना जाता है. आरती के दौरान श्रद्धापूर्वक दीपक को गोलाकार घुमाएं. आरती के अंत में जल से आचमन करें और हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें. आज के दिन दान का भी विशेष महत्व है.
- दान-पुण्य: आज का दिन दान और पुण्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु इन कार्यों को प्राथमिकता दें. आज के दिन जरूरतमंदों को सत्तू, मटका, पंखा, और अन्न का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है. गंगा दशहरा का यह पर्व हमें जीवन में सरलता, पवित्रता और निरंतरता बनाए रखने की प्रेरणा देता है.
गंगा दशहरा के दिन 'ॐ जय गंगे माता' की आरती करना सबसे शुभ माना जाता है. गंगा मैया भगवान शिव की जटाओं से होकर धरती पर आईं, इसलिए आरती के बाद भगवान शिव की स्तुति करना भी श्रेष्ठ है.

गंगा मैया की आरती (Maa Ganga Aarti)
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता.
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता. ॐ जय गंगे माता...
चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता.
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता. ॐ जय गंगे माता...
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता.
कृपा दृष्टि हो तेरी, मिट जाता त्राता. ॐ जय गंगे माता...
एकम से दशमी तक, जो व्रत को करता.
उसके सब ही पापों को, तू है हर लेती. ॐ जय गंगे माता...
पायन की बलिहारी, सब जग को भाता.
गंगा की लहरें गाएं, जय हो गंगे माता. ॐ जय गंगे माता...
जो इस आरती को गावे, भजता मन लावे.
दुख-दरिद्र मिट जावे, सुख-संपत्ति पावे. ॐ जय गंगे माता...
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता.
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता. ॐ जय गंगे माता...
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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