Saraswati Puja 2026: सनातन परंपरा में मां सरस्वती को ज्ञान, विद्या एवं कला की देवी माना जाता है. बुद्धि की देवी सरस्वती की पूजा के लिए बसंत पंचमी का पर्व अत्यंत ही शुभ माना गया है क्योंकि इस दिन उनका प्राकट्य हुआ था, लेकिन उनकी साधना और आराधना तक अधूरी रहती है, जब तक आप उनकी आरती का गान नहीं करते हैं.
हिंदू धर्म में वीणावादिनी या फिर कहें मां सरस्वती की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. सनातन परंपरा में मां सरस्वती की पूजा जहां दिवाली पर भगवान श्री गणेश और लक्ष्मी के साथ होती है, वहीं नवरात्रि के मौके पर बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में दुर्गा पूजा के साथ सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है, लेकिन माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी यानि बसंत पंचमी के पर्व सरस्वती के साधक उनकी बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ पूजन करते हैं क्योंकि इस दिन को उनका प्राकट्य दिवस माना जाता है.
हिंदू मान्यता के अनुसार मां सरस्वती हंस के वाहन पर सवारी करती हैं और अपने हाथ में वीणा लिए रहती हैं. भगवती सरस्वती के तीसरे हाथ में पुस्तक तो चौथे हाथ में माला रहती है. मां श्वेत कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं. मां सरस्वती को सफेद और पीला रंग बहुत प्रिय है. यही कारण है कि सरस्वती पूजा में उनके साधि सफेद या काले रंग के वस्त्र पहनकर उनकी विधि-विधान से पूजा करते हैं.
सरस्वती पूजा में माता को मिश्री, दही, सफेद रंग की मिठाई और केसर वाली खीर को विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. मां सरस्वती की पूजा में साधन के उनकी चालीसा, स्तोत्र का पाठ और मंत्रों का जाप करते हैं, लेकिन यह पूजा तब तक अधूरी रहती है, जब तक इसके अंत में मां सरस्वती की आरती नहीं गाई जाती है. आइए बुद्धि और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की आरती गाते है.
मां सरस्वती की आरती | Maa Saraswati Ki Aarti
ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता.
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता.
ॐ जय सरस्वती माता...
चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी.
सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी .
ॐ जय सरस्वती माता...
बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला.
शीश मुकुट मणी सोहें, गल मोतियन माला .
ॐ जय सरस्वती माता...
देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया.
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया .
ॐ जय सरस्वती माता...
विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो.
मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो .
ॐ जय सरस्वती माता...
धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो.
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो .
ॐ जय सरस्वती माता...
मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें.
हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें .
ॐ जय सरस्वती माता...
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता.
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता.
ॐ जय सरस्वती माता...
ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता.
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता.
ॐ जय सरस्वती माता...
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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