ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है, जो हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने का पावन अवसर है. आज पांचवां और आखिरी बड़ा मंगल है. अगर, आप हनुमान जी की कृपा और कुंडली में मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगलवार का व्रत रखना चाहते हैं, तो शास्त्रों के अनुसार इसके नियमों का पालन करना अनिवार्य है. चलिए आपको बताते हैं हनुमान जी का व्रत रखने के क्या नियम हैं?
व्रत का संकल्प और अवधि
21 मंगलवार का संकल्प- सनातन धर्म में यह व्रत लगातार 21 मंगलवार तक रखने का विधान माना जाता है.
शुरुआत का समय- किसी भी शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार या ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल से इस व्रत को शुरू करना अत्यंत शुभ होता है.
मंगलवार का व्रत करने के लाभ
मंगलवार का व्रत करने से मंगल संबंधी शुभ फल मिलते हैं. मंगलवार भगवान हनुमान को समर्पित है, जो कोई भी इस दिन उपवास करता है, वह भगवान हनुमान की अपार कृपा के साथ-साथ जीवन में सम्मान, शक्ति, साहस और प्रयासों को प्राप्त करता है. मंगलवार का व्रत निःसंतान दंपत्तियों के लिए भी उत्तम उपाय बताया गया है. इस व्रत को करने से संतान की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही मंगलवार का व्रत करने से मनुष्य के जीवन से भूत-प्रेत, दैत्य और काली शक्तियों का अशुभ प्रभाव कम या खत्म हो सकता है.
हनुमान जी सुबह की पूजा विधि
जल्दी स्नान- व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें.
दिशा का ध्यान- अपने घर के उत्तर-पूर्व कोने में एक साफ चौकी पर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
भोग और चोला- बजरंगबली को सिंदूर, चमेली का तेल या घी अर्पित करें, उन्हें बूंदी के लड्डू, चना या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं.
पाठ और दीपक- हनुमान जी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और पूरी श्रद्धा से हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें.
खान-पान और नमक के नियम
मंगलवार के व्रत में नमक का सेवन बिल्कुल वर्जित माना जाता है. इस व्रत में दिन में केवल एक बार ही भोजन यानी शाम के समय किया जाता है, जिसमें मीठा भोजन जैसे हलवा, पूरी या मीठी रोटी शामिल हो सकती है. आप व्रत के दिन बेसन के लड्डू या कोई मीठी वस्तु हनुमान जी को चढ़ाकर मंदिर या गरीबों में दान कर रहे हैं, तो उसे स्वयं ग्रहण न करें.
व्रत का पारण
मंगलवार का व्रत सूर्यास्त के बाद शाम की आरती और पूजा संपन्न करने के बाद ही खोला जाता है. शाम को हनुमान जी को मीठा भोग लगाकर स्वयं भी मीठे भोजन से व्रत का पारण करें.
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