विज्ञापन

Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल को क्यों कहा जाता है बुढ़वा मंगल, जानें इसका महाभारत की कथा से क्या है कनेक्शन?

Budhwa Mangal Kya Hota Hai: हिंदू मान्यता के अनुसार पवनपुत्र हनुमान जी की पूजा कभी भी और किसी दिन की जा सकती है, लेकिन मंगलवार के दिन की जाने वाली हनुमत साधना शीघ्र ही फलदायी होती है. मंगलवार की शुभता तब और भी बढ़ जाती है, जब यह ज्येष्ठ महीने में पड़ता है और बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहलाता है. ज्येष्ठ महीने के बड़ा मंगल को बुढ़वा मंगल क्यों कहते हैं और क्या है इसकी पूजा का महत्व, जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल को क्यों कहा जाता है बुढ़वा मंगल, जानें इसका महाभारत की कथा से क्या है कनेक्शन?
Budhwa mangal 2026: बुढ़वा मंगल की कथा, पूजा विधि और धार्मिक महत्व 
NDTV

Bdhwa Mngal Ki Kya Kahani Hai: हिंदू धर्म में हनुमत साधना सभी कष्टों को दूर करके कामनाओं को पूरा करने वाली मानी गई है. हिंदू मान्यता के अनुसार हनुमान जी चिरंजीवी हैं और प्रत्येक युग में पृथ्वी पर मौजूद रहते हैं और अपने भक्तों की प्रार्थना को सुनते ही उन्हें बचाने के लिए दौड़े चले आते हैं. यही कारण है कि हनुमत भक्त अपने आराध्य देवता को मनाने के लिए मंगलवार के दिन उनकी विशेष पूजा और प्रार्थना करते हैं. यही मंगल तब कहीं और भी ज्यादा पुण्यदायी और फलदायी हो जाता है, जब यह ज्येष्ठ मास में पड़ता है. ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले इस मंगलवार को बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है. आइए बुढ़वा मंगल पर्व के पीछे की रोचक कथा और इसके धार्मिक महत्व को विस्तार से जानते हैं. 

बुढ़वा मंगल की कहानी

Latest and Breaking News on NDTV

जेठ महीने के जिस मंगल को बुढ़वा मंगल कहा जाता है, उसका कनेक्शन महाभारत की कथा से जुड़ा हुआ है. महाभारत की कथा के अनुसार भीम जिनके पास 10 हजार हाथियों की बल था, उन्हें एक बार अपनी इस शारीरिक शक्ति का अभिमान हो गया. मान्यता है कि जब वे अज्ञातवास में अपने भाईयों के साथ वन में रह रहे थे तो अचानक से एक पुष्प द्रौपदी के पास उड़कर आया. द्रौपदी को वह पुष्प और उसकी खुशबू काफी पसंद आई. जिसके बाद द्रौपदी ने भीम से वैसे ही पुष्प लाने के लिए उस दिशा में भेज दिया. 

जब भीम को हुआ अपने बल पर अभिमान

Latest and Breaking News on NDTV

इसके बाद जब उस पुष्प को लेने के लिए निकले तो रास्ते जो भी लता या पेड़ आया, वे उसे उखाड़कर फेंकते हुए आगे बढ़ने लगे. मानों वह यह सिद्ध करना चाहते थे कि दुनिया में उनके समान कोई भी शक्तिशाली नहीं है. अभी कुछ दूर ही चले थे कि आगे उन्हें एक वृद्ध वानर अपनी लंबी सी पूंछ फैला लेटा हुआ मिला. तब भीम ने उस वानर से अपनी पूंछ हटाने को कहा. तब उस वानर ने कहा कि वह बहुत बूढ़ा और कमजोर है, इसलिए ऐसा करने में असमर्थ है. ऐसे में वह खुद ही उनकी पूंछ हटाकर एक तरफ कर दें. 

तब कुछ ऐसे टूटा भीम का घमंड

इसके बाद भीम ने उस पूंछ को उठाने की भरसक कोशिश की, लेकिन वे उसे हिला भी नहीं पाएं. जब तमाम कोशिशों के बाद पूंछ न हिली तो भीम समझ गये कि वो कोई साधारण वानर नहीं बल्कि स्वयं रुद्रावतार महाबली हनुमान जी हैं. इसके बाद जब भीम ने हनुमान जी से क्षमायाचना की तो हनुमान जी ने अपने वास्तविक स्वरूप में आकर उन्हें आशीर्वाद दिया. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस दिन हनुमान जी और भीम की मुलाकात हुई थी, वह दिन ज्येष्ठ मास का मंगल था. तभी से जेठ महीने में पड़ने वाले मंगल को बुढ़वा मंगल कहा जाने लगा. 

बुढ़वा मंगल की पूजा विधि और महाउपाय

Latest and Breaking News on NDTV

हिंदू मान्यता के अनुसार बुढ़वा मंगल वाले दिन साधक को प्रात:काल स्नान-ध्यान करने के बाद हनुमान जी की पूजा एवं व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद लाल रंग के आसन पर बैठकर विधि-विधान से हनुमत उपासना करनी चाहिए. हनुमान जी की पूजा प्रारंभ करने से पहले साधक को अपने पास एक चौकी, हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र, लाल रंग के पुष्प, सिंदूर, चमेली का तेल, जनेऊ, गुड़, चना, मोतीचूर का लड्डू, चूरमाए तुलसीपत्र, धूप, दीप, और मीठा पान रख लेना चाहिए. इसके बाद हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने के बाद विशेष रूप से मीठे पान का बीड़ा अर्पित करना चाहिए.

ये भी पढ़ें:

गरुण की गति, सुदर्शन का तेज और सत्यभामा का सौंदर्य, हनुमान ने कैसे तोड़ा एक साथ तीनों का घमंड?

Jyeshtha Adhik Purnima 2026: ज्ये​ष्ठ अधिक पूर्णिमा कब है? जानें पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा की पूजा विधि, महत्व और महाउपाय

बुढ़वा मंगल का पुण्यफल पाने के लिए साधक को विशेष रूप से हनुमान चालीसा का सात बार पाठ या फिर श्री सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए. बुढ़वा मंगल की पूजा के अंत में बजरंगी की शुद्ध देशी घी, कपूर आदि से आरती करनी चाहिए. बुढ़वा मंगल पर अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए किसी हनुमत धाम पर जाकर विशेष रूप से केसरिया ध्वज चढ़ाना चाहिए. मान्यता है​कि इस उपाय को करने पर हनुमान जी शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं।

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com