Asha Dashami Vrat 2026 Significance: पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि है, जिसे सनातन परंपरा में आशा दशमी के नाम से जाना जाता है. यह पावन दिन उन 10 आशा देवियों की पूजा एवं व्रत के लिए समर्पित है, जो साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्टों को दूर करके उनकी सभी कामनाओं को पूरा करने के लिए जानी जाती हैं. जीवन से जुड़े सभी मनोरथ को पूरा करने के लिए आज आशा दशमी व्रत की पूजा कब और कैसे करें और क्या है इसका धार्मिक महत्व, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
आशा दशमी व्रत का शुभ मुहूर्त
आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि प्रारंभ : 23 जुलाई 2026 की सुबह 7:03 बजे
आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि समाप्त : 24 जुलाई 2026 की सुबह 09:12 बजे
कब रखा जाएगा आशा दशमी व्रत : उदया तिथि के अनुसार आज 24 जुलाई 2026, शुक्रवार
अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:00 से लेकर 12:55 बजे तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 02:44 से लेकर 03:39 बजे तक
आशा दशमी व्रत की पूजा कैसे करें?

आज आशा दशमी व्रत पर दसों दिशाओं से जुड़ी देवियों का आशीर्वाद पाने के लिए साधक को सबसे पहले तन और मन से पवित्र होने के बाद इस व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प करना चाहिए. इसके बाद घर के ईशान कोण में एक चौकी पर दसों देवियों का चित्र स्थापित करने के बाद सबसे पहले उस पर गंगाजल या शुद्ध जल छिड़कना चाहिए.
यदि आपके पास 10 देवियों वाला चित्र न हो तो आप माता पार्वती के चित्र को स्थापित करके इस व्रत की पूजा विधि-विधान से करें. इसके बाद देवियों का पूजन धूप, दीप, रोली, चंदन, फल-फूल आदि के माध्यम से करने के बाद इस व्रत से जुड़ी राजा नल और दमयंती की कथा का पाठ करना चाहिए. आशा दशमी व्रत में साधक को देवियों को विशेष रूप से खीर का भोग लगाने के बाद अंत में उनकी आरती करनी चाहिए.
आशा दशमी व्रत का महाउपाय

आशा दशमी व्रत वाले दिन दसों दिशाओं की अधिष्ठात्री देवी का आशीर्वाद पाने के लिए साधक को दसों दिशाओं में शुद्ध घी का दीपक जलाकर 'आशाश्रचशा: सदा सन्तु सिद्धय्नताम मे मनोरथा: भवतिनाम प्रसादेन सदा कल्याणमसित्व्ती' मंत्र पढ़ना चाहिए. मान्यता है कि पूजा के इस उपाय से साधक पर शीघ्र ही दैवीय कृपा बरसती है.
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आशा दशमी व्रत का धार्मिक महत्व
हिंद धर्म में दशमी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. फिर चाहे वह विजया दशमी हो या फिर गंगा दशहरा हो. मान्यता है कि आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की नवमी के दिन विधि-विधान से आशा दशमी व्रत को करने वाले साधक की कीर्ति और यश दसों दिशाओं में बढ़ती है और माता की कृपा से पूरे साल धन-धान्य की कमी नहीं होती है. मान्यता है कि आशा दशमी व्रत के पुण्य प्रभाव से व्रत करने वाली महिला को वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है और उसके जीवन से जुड़े सभी कष्ट शीघ्र ही दूर हो जाते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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