- भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरत के लिए अधिकतर कच्चा तेल और LPG मिडिल ईस्ट से महंगे दामों पर आयात कर रहा है.
- जबकि भारत में बनी सोलर ऊर्जा बर्बाद हो रही है. देश में जितनी बिजली बनती है उसका सही इस्तेमाल ही नहीं हो पाता.
- सोलर बिजली के बर्बाद होने के मुख्य कारणों में दिन-रात के समय का अंतर, कोयले पर निर्भरता की कमी शामिल हैं.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई पर खतरे के बीच भारत के सामने एक बड़ी सच्चाई आई है. देश एक तरफ महंगा तेल और LPG आयात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपनी बनाई सोलर बिजली का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहा.
International Solar Alliance के डायरेक्टर जनरल आशीष खन्ना का कहना है कि अब सोलर एनर्जी को सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखना होगा.
क्यों बढ़ी चिंता?
मिडिल ईस्ट में संकट का सीधा असर तेल सप्लाई पर पड़ता है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम रास्ते पर खतरा बढ़ते ही भारत का तेल और LPG महंगा हो जाता है. महंगाई बढ़ती है. अर्थव्यवस्था पर दबाव आता है. ऐसे में बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल, करीब 90% LPG आयात करता है.
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बड़ा विरोधाभास: बिजली है, फिर भी कमी
भारत ने सोलर एनर्जी में तेजी से तरक्की की है.
- कुल बिजली क्षमता: 520 GW
- गैर-फॉसिल स्रोत: 265 GW+
- सोलर क्षमता: 140 GW+
लेकिन समस्या ये है कि 2025 में ही 2.3 टेरावॉट-घंटे सोलर बिजली बेकार चली गई. यानी जो बिजली लाखों घरों को मिल सकती थी, वह इस्तेमाल ही नहीं हुई.

क्यों बर्बाद हो रही है सोलर पावर?
इसकी वजहें सिस्टम से जुड़ी हैं:
1. समय का मिसमैच
सोलर बिजली दिन में बनती है. जरूरत शाम-रात में ज्यादा होती है.
2. कोयले का दबदबा
भारत की ~70% बिजली अभी भी कोयले से आती है. कोयला प्लांट जल्दी बंद/कम नहीं किए जा सकते.
3. ट्रांसमिशन की कमी
राजस्थान, गुजरात जैसे राज्यों में बिजली बनती है. लेकिन उसे दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त लाइनें नहीं हैं.
सबसे बड़ी कमी: स्टोरेज
सोलर बिजली को स्टोर करने की व्यवस्था (बैटरी आदि) अभी कम है. अगर स्टोरेज हो तो दिन की बिजली रात में इस्तेमाल हो सकती है. इससे बर्बादी रुकेगी. लेकिन भारत में यह अभी शुरुआती स्तर पर है. इसलिए बिजली स्टोर हो नहीं पाती.
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समाधान क्या है?
1. सोलर + स्टोरेज बढ़ाना
सिर्फ सोलर प्लांट नहीं, बैटरी भी तेजी से लगानी होगी.
2. बिजली पर शिफ्ट (Electrification)
LPG की जगह इलेक्ट्रिक कुकिंग. पेट्रोल-डीजल की जगह EV का इस्तेमाल बढ़ाया जाए.
3. स्मार्ट इस्तेमाल
दिन में ज्यादा बिजली इस्तेमाल (time-of-day pricing)
स्मार्ट मीटर और डिमांड मैनेजमेंट
4. ग्रिड अपग्रेड
पुराने बिजली सिस्टम को डिजिटल और स्मार्ट बनाना होगा.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
अशीष खन्ना के मुताबिक इस वक्त में एनर्जी सिक्योरिटी ही नेशनल सिक्योरिटी है. भारत को सोलर, स्टोरेज और इलेक्ट्रिफिकेशन को 2-3 गुना तेजी से बढ़ाना होगा.
एम्बर की एनर्जी एनालिस्ट रुचिता शाह ने कहा, '2025 में 38 गीगावॉट सौर क्षमता जोड़ी गई, लेकिन ट्रांसमिशन बाधाओं और ग्रिड सुरक्षा से जुड़े आपात उपायों के कारण नवीकरणीय ऊर्जा की कटौती (कर्टेलमेंट) वर्ष की प्रमुख चुनौती बनकर उभरी. कई मायनों में यह कटौती इस क्षमता के निर्माण के उद्देश्य को ही कमजोर करती है. हालांकि 2025 में ग्रिड‑सुरक्षा से जुड़ी कटौती अपने आप में बड़ी चिंता नहीं थी, क्योंकि इसका मुख्य कारण अपेक्षा से कम मांग रहा, लेकिन इसने उच्च‑सौर भविष्य के लिए एक वास्तविक ‘स्ट्रेस टेस्ट' का काम किया. इससे यह सच्चाई सामने आई कि लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) के बिना स्वच्छ ऊर्जा का कुशल विस्तार संभव नहीं है.'
भारत के पास सूरज की भरपूर ताकत है, लेकिन सिस्टम कमजोर है. जब देश महंगा तेल खरीद रहा हो और अपनी सस्ती बिजली बर्बाद कर रहा हो. तो यह सिर्फ आर्थिक नहीं, रणनीतिक नुकसान भी है. फिलहाल भारत के लिए असली चुनौती बिजली बनाना नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से इस्तेमाल करना है.
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