
कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि उसे लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद मिलने में किसी तरह की कानूनी अड़चन नहीं है, जबकि उसके सांसद लोकसभा में सदस्यों की जरूरी संख्या से कम हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा, 'निश्चित रूप से वैधानिक शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए। लेकिन विपक्ष के तौर पर नेता या पार्टी को मान्यता देने के लोकसभा अध्यक्ष के विशेषाधिकार को लेकर वाकई कोई कानूनी अड़चन नहीं है।' इसी तरह के स्वर में पूर्व कानूनमंत्री एम वीरप्पा मोइली ने आज कहा कि कानून को पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि इस पद के लिए जिस व्यक्ति को मान्यता दी जानी चाहिए वह सर्वाधिक संख्या वाले विपक्षी दल का नेता होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में आवश्यक संख्या में सदस्य नहीं होने के बावजूद कांग्रेस को सदन में प्रतिपक्ष के नेता का पद मिलना चाहिए।
मोइली ने इस तरह के सुझाव को खारिज कर दिया कि 44 सदस्य होने के कारण कांग्रेस को प्रतिपक्ष के नेता का पद नहीं मिल सकता।
उन्होंने एक बयान में कहा कि संसद में प्रतिपक्ष के नेताओं के वेतन और भत्ते कानून, 1977 की धारा 2 में लिखित इस कानूनी आवश्यकता के अलावा उन्हें ऐसा लगता है कि सदन के कोरम के लिए आवश्यक सदस्यों की संख्या के बराबर ऐसी पार्टी के सदस्यों की न्यूनतम संख्या होने जैसी कोई अन्य शर्त नहीं है।
मोइली ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा प्रतिपक्ष के नेता को मान्यता देने के मामले में अपनाई जा रही परंपरा के कारण इस मसले पर ऐसा 'संशय' हुआ है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के निर्देशों के 121 के निर्देश को पढ़ने की परंपरा रही है जो कहता है कि संसदीय दल या समूह को मान्यता देते समय अध्यक्ष को सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके पास कम से कम सदन की बैठक के लिए निर्धारित न्यूनतम कोरम के बराबर सदस्यों की संख्या हो। यह सदन के सदस्यों की संख्या का दसवां हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसलिए निर्देश 121 और कानून की धारा 2 को एकसाथ पढ़ कर ही 55 सदस्यों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि अध्यक्ष के निर्देश विधायी जरूरत का स्थान नहीं ले सकते हैं।
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