
नरेंद्र मोदी पर प्रहार करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उनके शासन की 'स्पष्ट एवं अक्षम्य नाकामी' के लिए 'कानूनी जवाबदेही' की मांग की और उन्हें क्लीनचिट के दावे को खारिज करते हुए इसे 'सुविधा की राजनीति' लेकिन 'काफी जल्दबाजी भरी' धारणा बताया।
मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को नैतिक आधार पर जवाबदेह बताते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रचारक ने कहा, 'इसके अलावा उनके शासन की स्पष्ट एवं अक्षम्य नाकामी के लिए कानूनी जवाबदेही होनी चाहिए।'
राहुल गांधी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार के दौरान भाजपा की इस दलील के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी और अदालतों ने मोदी को क्लीनचिट दी है और इसलिए उन्हें गोधरा की घटना के बाद गुजरात दंगों के बारे में माफी मांगना या कोई जवाब नहीं देना है।
उन्होंने जवाब दिया, 'जैसा आप जानते हैं, एसआईटी रिपोर्ट पर कई विश्वसनीय विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल किए हैं। एसआईटी के कामकाज में गंभीर त्रुटियों की ओर इशारा किया गया है। निचली अदालत ने जिस त्रुटिपूर्ण एसआईटी रिपोर्ट को स्वीकार किया है, उसकी न्यायिक जांच उच्चतर अदालतों में की जानी बाकी है।'
नरेंद्र मोदी पर प्रहार करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उनके शासन की 'स्पष्ट एवं अक्षम्य नाकामी' के लिए 'कानूनी जवाबदेही' की मांग की और उन्हें क्लीनचिट के दावे को खारिज करते हुए इसे 'सुविधा की राजनीति' लेकिन 'काफी जल्दबाजी भरी' धारणा बताया।
मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को नैतिक आधार पर जवाबदेह बताते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रचारक ने कहा, 'इसके अलावा उनके शासन की स्पष्ट एवं अक्षम्य नाकामी के लिए कानूनी जवाबदेही होनी चाहिए।'
राहुल गांधी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार के दौरान भाजपा की इस दलील के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी और अदालतों ने मोदी को क्लीनचिट दी है और इसलिए उन्हें गोधरा की घटना के बाद गुजरात दंगों के बारे में माफी मांगना या कोई जवाब नहीं देना है।
उन्होंने जवाब दिया, 'जैसा आप जानते हैं, एसआईटी रिपोर्ट पर कई विश्वसनीय विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल किए हैं। एसआईटी के कामकाज में गंभीर त्रुटियों की ओर इशारा किया गया है। निचली अदालत ने जिस त्रुटिपूर्ण एसआईटी रिपोर्ट को स्वीकार किया है, उसकी न्यायिक जांच उच्चतर अदालतों में की जानी बाकी है।'
राहुल ने कहा, '2002 के दंगों में श्री मोदी की जिम्मेदारी का इशारा करने वाले साक्ष्य और विशिष्ट आरोप की अभी पर्याप्त रूप से जांच की जानी है। उन्हें क्लीनचिट दिए जाने की कोई बात राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो सकती है, लेकिन यह काफी जल्दबाजी भरी धारणा है। कई अनुत्तरित सवाल हैं। देश को काफी कुछ जानने की आवश्यकता है।'
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव को वह अपने तथा मोदी के बीच वस्तुत: राष्ट्रपति शैली के चुनाव के रूप में नहीं देखते। उन्होंने कहा, 'यह भारत को लेकर दो विचारों के बीच मुकाबला है।' उन्हेंने दलील दी कि कांग्रेस ऐसे विचार का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें मानवता और समावेश के आदर्शों को कायम रखते हुए हमारे हर देशवासी की गरिमा और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है।' जबकि भाजपा ऐसा भारत चाहती है 'जिसमें गरीबों के लिए कोई स्थान नहीं है, भिन्न धर्म या विचारधारा के लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है।'
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा 'भारत में पाए जाने वाले विभिन्न विचारों के दमन' की पक्षधर है और वह 'ऐसा भारत चाहती है जिसमें सत्ता (कुछ) लोगों के हाथों में केंद्रित हो। यह भारत के दो विचारों के बीच का संघर्ष है।'
राहुल गांधी ने कहा, 'श्री मोदी जिस विचार का प्रतिनिधित्व करते हैं, वह भारत के लिए खतरनाक है।'
इस सवाल पर कि लोग संप्रग सरकार के फीके प्रदर्शन से निराश प्रतीत होते हैं और मोदी जैसे मजबूत नेता को पसंद करते हैं, राहुल गांधी ने कहा, 'हां, मैं समझता हूं कि भारत को 'मजबूत' नेता की आवश्यकता है, लेकिन हमें यह गहरी समझ होनी चाहिए कि 'मजबूती' का क्या अर्थ है।'
उन्होंने कहा, 'मेरे लिए ताकत, निरंकुश तरीके से अपनी बात किसी पर थोपना या मनवाना नहीं है... मैं मानता हूं कि ऐसी निरंकुश मानसिकता जो अपने विचारों के लिए असुविधाजनक बातों को हटाने में विश्वास करती हो, घातक है क्योंकि ऐसे लोग जो फायदेमंद है उसके बदले सही को दरकिनार कर सकते हैं।'
मोदी के चुनाव प्रचार और उन्हें 'शहजादा' कहने जैसी उनकी भाषा के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा कि जहां तक राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा प्रयुक्त भाषा का सवाल है, 'किसी नेता की भाषा और शब्दों के विकल्प के बारे में देश की जनता को तय करना है।'
भ्रष्टाचार से निपटने में भाजपा के रिकार्ड को लेकर उस पर बरसते हुए राहुल ने कहा कि भाजपा के पास कर्नाटक में एक मुख्यमंत्री थे जो भ्रष्टाचार के आरोप में जेल गए। दोषी करार दिए गए और आरोपित मंत्री अभी भी गुजरात कैबिनेट में बने हुए हैं।
राहुल ने एक अन्य उदाहरण दोषी ठहराए गए सांसदों को अयोग्य ठहराने के शीर्ष अदालत के फैसले पर जारी अध्यादेश वाले मामले का दिया। इस मामले में उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भिन्न रुख अपनाया क्योंकि शुरू में उन्हें खारिज कर दिया गया था। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, 'तब मैंने अपनी राय सार्वजनिक करने का कदम उठाया।'
उनका इशारा उस संवाददाता सम्मेलन की ओर था जहां उन्होंने कहा था कि इस अध्यादेश को फाड़कर फेंक देना चाहिए। वह वहां जनता की राय व्यक्त कर रहे थे और पार्टी ने उनकी बात सुनी।
इस मुद्दे पर उनके सार्वजनिक रूप से बयान देने पर विवाद पैदा हो गया था क्योंकि उन्होंने ऐसे समय यह बयान दिया था जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विदेश में थे।
इस विवाद पर राहुल गांधी ने कहा, 'बाद में यह समझ में आया कि इस विषय को बेहतर ढंग से निबटाया जा सकता था।'
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