राजधानी दिल्ली से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सिस्टम की संवेदनहीनता और लापरवाही की सारी हदें पार कर दी हैं. दिल्ली के जनकपुरी इलाके में जल बोर्ड द्वारा खोदे गए एक खुले गड्ढे ने पालम निवासी कमल नाम के युवक की जान ले ली. यह हादसा इतना दर्दनाक है कि इसने हाल ही में ग्रेटर नोएडा में हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की याद दिला दी.

मौत का जाल: न बैरिकेडिंग, न चेतावनी
हैरानी की बात यह है कि सड़क के बीचों-बीच मौत का यह गड्ढा खुला पड़ा था, लेकिन न तो वहां कोई बैरिकेडिंग की गई थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था. अंधेरे में बाइक सवार कमल इस मौत के गड्ढे का शिकार हो गया. हैरानी की बात तो ये है कि जब हादसा हो गया और एक शख्स की जान चली गई तो आनन-फानन में वहां 'पर्दे' लगा दिया.
परिवार का गंभीर आरोप: "रात भर तड़पता रहा मेरा लाल"
मृतक कमल के परिजन का कहना है कि कमल रात भर उस गड्ढे में गिरकर तड़पता रहा, लेकिन उसे बचाने के लिए कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची. परिजन रात भर उसकी तलाश में एक नहीं, बल्कि दर्जनभर थानों के चक्कर काटते रहे, लेकिन पुलिस ने कोई मदद नहीं की. सुबह करीब 7 बजे पुलिस ने फोन कर शव मिलने की सूचना दी. कमल के भाई ने बताया, "ये साफ लापरवाही है, मंगोलपुर, रोहिणी, जनकपुरी समेत 7-8 थानों के चक्कर लगाए. दिल्ली पुलिस ने काफी मान-मनुहार के बाद मोबाइल फोन ट्रेसिंग के बाद कहा कि ये जनकपुरी के 200 मीटर के एरिया में लोकेशन है, ढूंढ़ सको तो खोज लो. फिर सुबह 6.30 बजे पुलिस ने फोन कर कहा कि उनका भाई गड्ढे में गिर गया है.

चश्मदीद का सनसनीखेज दावा: पुलिस पर उठे सवाल
इस मामले में मृतक के दोस्त और चश्मदीद ने दिल्ली पुलिस की थ्योरी पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. चश्मदीद का दावा है कि "पहले उस गड्ढे में लाश नहीं थी, फिर अचानक सुबह 7 बजे वहां शव कैसे आ गया?"
मंत्री आशीष सूद के क्षेत्र में हादसा, जांच के आदेश
यह दर्दनाक हादसा कैबिनेट मंत्री आशिष सूद के विधानसभा क्षेत्र में हुआ है. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच के आदेश दे दिए हैं कि आखिर दिल्ली जल बोर्ड या अन्य संबंधित एजेंसियों से कहां चूक हुई.
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