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This Article is From May 09, 2020

जफरुल इस्लाम के घर छापेमारी पर मुस्लिम तंजीमों ने जताई आपत्ति, पुलिस पर लगाया दबाव में काम करने का आरोप

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम के घर बुधवार को की गई छापेमारी को निंदनीय करार देते हुए मुस्लिम तंज़ीमों ने पुलिस पर सत्ता और राजनैतिक पार्टी के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है.

जफरुल इस्लाम के घर छापेमारी पर मुस्लिम तंजीमों ने जताई आपत्ति, पुलिस पर लगाया दबाव में काम करने का आरोप
जफरुल इस्लाम के घर पर इफ्तार के समय उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस पहुंची थी
नई दिल्ली:

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम के घर बुधवार को की गई छापेमारी को निंदनीय करार देते हुए मुस्लिम तंज़ीमों ने पुलिस पर सत्ता और राजनैतिक पार्टी के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है. गौरतलब है कि बुधवार को ओखला के अबुल फज़ल एन्क्लेव में जफरुल इस्लाम के घर पर इफ्तार के समय उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस पहुंची, लेकिन इलाके के लोगों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, और पुलिस लौट गई, लेकिन उन्होंने ज़फरुल इस्लाम से मोबाइल और लैपटॉप जमा करने के लिए कहा. जफरुल इस्लाम पर कुवैत और अन्य अरब देशों के मामलों में राजद्रोह का मुकदमा दर्ज है, जिसकी जांच साइबर सेल कर रहा है.

मुस्लिम नेताओं ने जफरुल इस्लाम के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लेने की मांग की है. जमीयत उलेमा ए हिन्द के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी, मुस्लिम इत्तिहाद परिषद (बरेली) के प्रमुख मौलाना तौक़ीर रज़ा खां, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी, फतेहपुरी (दिल्ली) स्थित मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम समेत कई मुस्लिम नेताओं ने बयान जारी कर सरकार से मांग की है कि डॉक्टर जफरुल इस्लाम खां के खिलाफ FIR को वापस लिया जाए, और दिल्ली पुलिस को बेकसूर लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका जाए.

 संयुक्त बयान के मुताबिक, कुछ ही वक्त पहले पूर्वी दिल्ली में जान-माल की बड़े पैमाने पर तबाही के असल मुजरिमों को गिरफ्तार करने में नाकाम रहने के बाद दिल्ली पुलिस अब निर्दोषों के हक में आवाज़ उठाने वालों या सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों निशाना बना रही है, जो देश के लिए खतरनाक स्थिति है.

फतेहपुरी (दिल्ली) स्थित मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम ने NDTV से कहा कि जफरुल इस्लाम के खिलाफ देशद्रोह का केस दायर किया जाना इंसाफ के खिलाफ है, और उसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जफरुल इस्लाम के ट्वीट को तोड़-मरोड़कर किसी कार्रवाई का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. मौलाना मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम के मुताबिक, जफरुल इस्लाम के ट्वीट में ऐसी कोई बात नहीं है, जिससे बगावत और गद्दारी की बू आ रही हो.

 जोधपुर (राजस्थान) स्थित मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने NDTV से कहा कि जफरुल इस्लाम के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करना अफसोसनाक तो है ही, यह भी साबित कर रहा है कि पुलिस एक राजनैतिक पार्टी के इशारे पर उनका एजेंडा लागू करने में मदद कर रही है. इसी मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत के अध्यक्ष नावेद हामिद ने NDTV से कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसी भी नेता के खिलाफ दिल्ली दंगों से पहले दिए भड़काऊ भाषणों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे ज़ाहिर है कि इसके पीछे सत्तारूढ़ केंद्रीय नेताओं का दबाव काम कर रहा था. उन्होंने कहा कि जफरुल इस्लाम के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा हास्यास्पद ही नहीं, कानून का खुला दुरुपयोग है.

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