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राजधानी में 'वॉटर इमरजेंसी... 9 में से 7 ट्रीटमेंट प्लांट संकट में, 4 फरवरी तक पानी को तरसेगी दिल्ली

राजधानी के 7 प्रमुख वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. दिल्ली के सबसे बड़े वजीराबाद प्लांट को पूरी तरह बंद करना पड़ा है.

राजधानी में 'वॉटर इमरजेंसी... 9 में से 7 ट्रीटमेंट प्लांट संकट में, 4 फरवरी तक पानी को तरसेगी दिल्ली
  • यमुना के पानी में अमोनिया का स्तर बढ़ने से दिल्ली के 9 में से 7 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रभावित हुए हैं
  • वजीराबाद प्लांट पूरी तरह बंद हो चुका है. बाकी प्लांट भी प्रभावित हैं. सिर्फ 2 प्लांट चल ही चल पा रहे हैं
  • दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक, इसकी वजह से शहर के बड़े हिस्से में 4 फरवरी तक पानी की किल्लत रह सकती है
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दिल्ली में पानी का भीषण संकट पैदा हो गया है. यमुना के पानी में अमोनिया का स्तर बढ़ने और मुनक नहर की मरम्मत के कारण राजधानी के 7 प्रमुख वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. दिल्ली के सबसे बड़े वजीराबाद प्लांट को पूरी तरह बंद करना पड़ा है. इसकी वजह से दिल्ली के बड़े इलाके में पानी की सप्लाई चरमरा गई है. दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक, इस समस्या के चलते शहर के बड़े हिस्से में 4 फरवरी तक पानी की किल्लत रह सकती है. 

किस प्लांट पर कितना असर?

  • वजीराबाद प्लांट सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जिसकी क्षमता 140 MGD (मिलियन गैलन प्रतिदिन) है. अमोनिया की मात्रा बढ़ने से यहां उत्पादन जीरो हो गया है. 
  • इसके अलावा चंद्रावल प्लांट की क्षमता 50 प्रतिशत तक कम हो गई है. यह दिल्ली को 100 एमजीडी पानी सप्लाई करता है.  
  • हैदरपुर के दोनों प्लांट (फेज 1 और 2) 75 प्रतिशत क्षमता पर ही काम कर पा रहे हैं. इनके जरिए 200 एमजीडी पानी की सप्लाई होती है. 
  • बवाना, द्वारका और नांगलोई में बने प्लांट भी इस संकट की चपेट में हैं. ये तीनों मिलकर 100 एमजीडी पानी की आपूर्ति करते हैं. 
  • राजधानी में सिर्फ सोनिया विहार और भागीरथी प्लांट ही ऐसे हैं, जिन पर असर नहीं पड़ा है. ये प्लांट गंगा कनाल से पानी लेते हैं. 

हर साल आती है समस्या

अधिकारियों का कहना है कि हर साल सर्दियों में यमुना में अमोनिया का स्तर 1 ppm (पार्ट्स पर मिलियन) से ऊपर चला जाता है, जिसे साफ करने की क्षमता मौजूदा प्लांटों में नहीं है. इसकी वजह से हर साल ऐसी समस्या आती है, लेकिन इस बार संकट कुछ ज्यादा है.

इस बार आया डबल संकट 

दरअसल यमुना के पानी में अमोनिया बढ़ने पर मुनक नहर के साफ पानी को मिलाकर पीने योग्य बनाया जाता है. लेकिन इस वक्त मुनक नहर की मरम्मत चलने के कारण हरियाणा से पानी की सप्लाई कम हो गई है. यही वजह है कि दिल्ली के पास अब कच्चे पानी को डाइल्यूट (साफ) करने का विकल्प भी सीमित हो गया है.

संकट के इस समय में सिर्फ सोनिया विहार और भागीरथी प्लांट से ही आस है. इन पर अमोनिया संकट का असर नहीं पड़ा है क्योंकि ये गंग नहर से पानी लेते हैं. दिल्ली जल बोर्ड ने निवासियों से पानी का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने की अपील की है. 

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