- दिल्ली सरकार ने 923 कोचिंग सेंटर की सुरक्षा जांच कराने का निर्णय लिया है शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने जानकारी दी
- सुरक्षा जांच का उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित और कोचिंग संस्थानों में अनियमितताओं को रोकना है
- मंत्री ने कहा कि कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा और आवश्यक सुधार किए जाएंगे
लखनऊ के कोचिंग में लगी आग के बाद अब दिल्ली सरकार भी कोचिंग शिक्षण संस्थान में आग से बचाव के उपाय की जांच करने के लिए गुरुवार से बड़ा अभियान चलाने का ऐलान किया है. दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बुधवार को राजधानी में संचालित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, आधारभूत संरचना तथा नियामकीय व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में गृह विभाग, नगर निगम (एमसीडी), शहरी विकास विभाग, दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) तथा उच्च शिक्षा निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.
दिल्ली के 900 से ज्यादा कोचिंग की होगी जांच
बैठक में आशीष सूद ने कोचिंग संस्थानों में मौजूद आधारभूत संरचना संबंधी कमियों एवं सुरक्षा मानकों में पाई जा रही खामियों पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा, कल्याण एवं जीवन से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. शिक्षा मंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक एवं दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाए.
तत्काल कार्रवाई के तहत शिक्षा मंत्री ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), एमसीडी, दिल्ली अग्निशमन सेवा तथा डीडीएमए को राजधानी के प्रमुख कोचिंग हब्स मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर एवं कटवरिया सराय में विशेष निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. निरीक्षण अभियान को प्रभावी बनाने के लिए एमसीडी द्वारा दिल्ली में सर्वेक्षित 923 कोचिंग संस्थानों की सूची संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई जाएगी.
लखनऊ हादसे ने खड़े किए गंभीर सवाल
दिल्ली सरकार का यह फैसला सोमवार को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुई उस दिल दहला देने वाली घटना के बाद आया है, जहां एक तीन मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई थी. लखनऊ के उषा मेहता मार्ग पर स्थित इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप थी, जबकि ऊपरी मंजिलों पर कोचिंग इंस्टीट्यूट, कंप्यूटर लाइब्रेरी और गेमिंग जोन का संचालन हो रहा था.
निचले हिस्से में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बिल्डिंग की संकरी सीढ़ियां काले जहरीले धुएं और लपटों की चपेट में आ गईं. वेंटिलेशन न होने के कारण छात्रों का दम घुटने लगा. जान बचाने के लिए कई छात्र खिड़कियों से नीचे कूदे, तो कुछ ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, जहां दम घुटने और झुलसने से उन्होंने दम तोड़ दिया. दमकलकर्मियों ने दीवार तोड़कर और स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया.
लखनऊ अग्निकांड में क्या कार्रवाई हुई?
इस भीषण त्रासदी के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया. सीएम के निर्देश पर मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसमें संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत प्रमुख और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार शामिल हैं. यह एसआईटी 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
लापरवाही बरतने और नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तूशॉक कृष्णा जायसवाल को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, बिजली विभाग के एक्सईएन (जानकीपुरम) गौरव कुमार, अग्निशमन अधिकारी (इंदिरा नगर) कमलेंद्र कुमार सिंह, और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के एई अनिल कुमार व जेई प्रमोद पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान
इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है. केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया गया है. वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. घायलों का इलाज केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है.
यह भी पढ़ें: कोई खिड़की से कूदा, कोई बाथरूम में हुआ बंद... परिजनों ने बयां किया लखनऊ अग्निकांड का वो खौफनाक मंजर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं