
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह डिजिटल हो गई है
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है डिजिटल इंडिया का. इस सपने को सच बनाने के मकसद से जामिया मिल्लिया इस्लामिया केंद्रीय विश्विद्यालय अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. जामिया, पहला केंद्रीय विश्वविद्यालय है जहां परीक्षा और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज़ कर दिया गया है. इस पूरी प्रक्रिया में कागज़ का इस्तेमाल न के बराबर हो रहा है. शैक्षणिक सत्र 2016-17 में जामिया में अलग-अलग कोर्सेज में पढ़ने वाले करीब 50 हज़ार छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया और उनके रिजल्ट्स भी ऑनलाइन घोषित किए गए.
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परीक्षा प्रक्रिया डिजिटाइज़ होने से पहले छात्र परीक्षा फॉर्म भरते थे, मार्क्स का इवैल्यूएशन और सबमिशन और रिजल्ट्स वगैरह सब मैन्युअल मोड में होता था. लेकिन डिजिटाइज़ होने के बाद पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो गयी है. जब मैन्युअल मोड में प्रक्रिया होती थी तो उसमें कागज़ का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होता था, गलती की संभावना भी रहती थी और परीक्षाफल भी देरी से आता था.
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अब नए डिजिटल सिस्टम के तहत छात्र अपना परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन भरते हैं, उन्हें ई-एडमिट कार्ड मिलता है और एग्जामिनर ऑनलाइन अंक चढ़ाते हैं. इस वजह से समय की बहुत बचत हो रही है और आखरी परीक्षा के 15 दिन के अंदर परीक्षाफल आ जाता है. परीक्षा प्रक्रिया डिजिटाइज़ होने की वजह से कागज़ की खपत बहुत कम हो गयी है, जिसकी वजह से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी जामिया अपना योगदान दे रहा है.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. तलत अहमद ने इस पर कहा कि परीक्षा किसी भी विश्वविद्यालय का एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य होता है. कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन ऑफिस का छात्रों और अध्यापकों से सीधा जुड़ाव होता है. दोनों ही किसी भी विश्विद्यालय के 2 सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं. परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावशाली, सरल और पारदर्शी होनी चाहिए और जामिया में ये प्रक्रिया डिजिटल होने की वजह से ये सभी उद्देशय पूरे हो रहे हैं
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परीक्षा प्रक्रिया डिजिटाइज़ होने से पहले छात्र परीक्षा फॉर्म भरते थे, मार्क्स का इवैल्यूएशन और सबमिशन और रिजल्ट्स वगैरह सब मैन्युअल मोड में होता था. लेकिन डिजिटाइज़ होने के बाद पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो गयी है. जब मैन्युअल मोड में प्रक्रिया होती थी तो उसमें कागज़ का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होता था, गलती की संभावना भी रहती थी और परीक्षाफल भी देरी से आता था.
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. तलत अहमद ने इस पर कहा कि परीक्षा किसी भी विश्वविद्यालय का एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य होता है. कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन ऑफिस का छात्रों और अध्यापकों से सीधा जुड़ाव होता है. दोनों ही किसी भी विश्विद्यालय के 2 सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं. परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावशाली, सरल और पारदर्शी होनी चाहिए और जामिया में ये प्रक्रिया डिजिटल होने की वजह से ये सभी उद्देशय पूरे हो रहे हैं
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