
दिल्ली की एक अदालत ने आपराधिक मामले से नाम हटाने के एवज में एक व्यक्ति से चार लाख रुपए की रिश्वत लेने के मामले में राष्ट्रीय राजधानी के एक पुलिस उपनिरीक्षक को चार साल के कारावास की सजा सुनाई है. विशेष न्यायाधीश संतोष स्नेही मान ने दिल्ली पुलिस के अधिकारी दयाराम को भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया और उस पर 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया. अदालत ने हाल में अपने आदेश में कहा, ‘अभियोजन ने संदेह से परे यह सफलतापूर्वक साबित किया है कि दयाराम ने चाणक्यपुरी थाने में उपनिरीक्षक रहने के दौरान शिकायतकर्ता से आपराधिक मामले में उसका नाम हटाने के लिए 50 हजार रुपए की रिश्वत ली.'
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वहीं अभियोजन के अनुसार, संबंधित उपनिरीक्षक फर्जी दस्तावेज तैयार करने और इनका इस्तेमाल करने के मामले में शिकायकर्ता हरबंस सिंह के खिलाफ जांच कर रहा था. सिंह के खिलाफ अमेरिकी दूतावास ने मामला दर्ज कराया था. उपनिरीक्षक ने सिंह से मामले में उसका नाम हटाने के लिए चार लाख रुपए की रिश्वत मांगी. सिंह ने 2014 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के पास उपनिरीक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. CBI ने उसे तब गिरफ्तार कर लिया, जब वह रिश्वत के हिस्से के रूप में 50 हजार रुपये ले रहा था.
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हालांकि, पुलिस उपनिरीक्षक ने आरोपों से इनकार किया था. मुकदमे के दौरान पाया गया कि आपराधिक मामले में सिंह को गिरफ्तार करने के आदेश के बावजूद उपनिरीक्षक दयाराम ने उसे हिरासत में नहीं लिया. इसकी जगह वह उससे चंडीगढ़ में मिला और केवल नोटिस जारी किए.
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