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दिल्ली मेट्रो में कॉल ड्रॉप की असली वजह क्या है? जांच में सामने आए मोबाइल सिग्नल के ब्लैकस्पॉट और कॉल ड्रॉप जोन

मेट्रो में रील देखते-देखते इंटरनेट रुक जाता है? वीडियो कॉल बीच में फ्रीज हो जाती है? 490 किलोमीटर रूट पर ट्राई की बड़ी जांच में पूरी तस्वीर सामने आ गई. पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

दिल्ली मेट्रो में कॉल ड्रॉप की असली वजह क्या है? जांच में सामने आए मोबाइल सिग्नल के ब्लैकस्पॉट और कॉल ड्रॉप जोन
24 साल पहले पहली बार दिल्ली में मेट्रो ट्रेन चली थी
PTI
  • ट्राई ने 490 किलोमीटर लंबे मेट्रो और नमो भारत नेटवर्क पर मोबाइल सेवाओं की जांच की.
  • कई हिस्सों में कवरेज गैप सामने आया, सबसे ज्यादा कमजोरी एमटीएनएल नेटवर्क में दर्ज हुई.
  • 5जी स्पीड अच्छी मिली, लेकिन नेटवर्क और कवरेज अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

दिल्ली मेट्रो के राजीव चौक स्टेशन पर हर रोज सुबह-शाम लोगों का सैलाब उमड़ता है. हाथ में लैपटॉप और मोबाइल फोन लिए दिल्ली मेट्रो लाखों लोगों का चलता-फिरता डिजिटल संसार बन चुकी है. पर सफर कर रहे इन लोगों को आय दिन मोबाइल के कॉल ड्रॉप और कमजोर नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ता है. व्हाट्सएप मैसेज भेजने में देरी, इंस्टाग्राम रील का रुक जाना, वीडियो कॉल फ्रीज हो जाना या ऑनलाइन पेमेंट बीच में अटक जाना, कई बार ऐसा किसी मीटिंग या इंटरव्यू के दौरान या घरवालों से बातचीत के दौरान होता है.

आमतौर पर लोग इसे अपने मोबाइल फोन या टेलीकॉम कंपनी की समस्या मानकर भूल जाते हैं. लेकिन अब भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई की ताजा जांच ने यह साफ कर दिया है कि दिल्ली-एनसीआर के कुछ मेट्रो रूटों पर कॉल ड्रॉप की समस्या वास्तव में मौजूद है और इसकी लोकेशन की पहचान कर ली गई है.

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दिल्ली मेट्रो के अधिकतर कॉरिडोर पर मोबाइल नेटवर्क कमजोर पाए गए हैं
Photo Credit: AFP

490 किलोमीटर का टेस्ट और चौंकाने वाले नतीजे

ट्राई ने दिल्ली-एनसीआर के मेट्रो नेटवर्क पर व्यापक ड्राइव टेस्ट किया. जांच के नतीजे बताते हैं कि दिल्ली मेट्रो के कई हिस्सों में अभी भी मोबाइल कवरेज पूरी तरह मजबूत नहीं है. ट्राई ने करीब 490 किलोमीटर लंबे मेट्रो और दिल्ली-मेरठ रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम पर मोबाइल नेटवर्क की क्वालिटी की सघन जांच अप्रैल के महीने में की जिसकी रिपोर्ट अब सामने आई है. इसमें ब्लू लाइन, येलो लाइन, रेड लाइन, ग्रीन लाइन, पिंक लाइन, मैजेंटा लाइन, एयरपोर्ट एक्सप्रेस, नोएडा एक्वा लाइन, गुरुग्राम रैपिड मेट्रो और दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर तक को शामिल किया गया.

जिन मेट्रो रूट्स पर जांच की गई

1. सेक्टर-51 नोएडा से डिपो स्टेशन तक (एक्वा लाइन)
2. द्वारका सेक्टर-21 से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी (ब्लू लाइन 1)
3. वैशाली से यमुना बैंक तक (ब्लू लाइन 2)
4. कीर्ति नगर से ब्रिगेडियर होशियार सिंह (ग्रीन लाइन)
5. द्वारका से ढांसा बस स्टैंड (ग्रे लाइन)
6. बॉटनिकल गार्डन से कृष्णा पार्क एक्सटेंशन (मैजेंटा लाइन)
7. दीपाली चौक से मजलिस पार्क तक (मैजेंटा लाइन एक्सटेंशन)
8. नई दिल्ली से यशोभूमि द्वारका सेक्टर-25 (ऑरेंज लाइन)
9. मयूर विहार-1 से मौजपुर-बाबरपुर (पिंक लाइन)
10. शिव विहार से मयूर विहार-1 (पिंक लाइन एक्सटेंशन)
11. सेक्टर 55-56 से फेज-3 (रैपिड मेट्रो) तक
12. शहीद स्थल से रिठाला (लाल रेखा)
13. राजा नाहर सिंह (बल्लभगढ़) से कश्मीरी गेट (वायलेट लाइन)
14. समयपुर बादली से मिलेनियम सिटी सेंटर तक (पीली लाइन)
15. दिल्ली से मेरठ (नमो भारत आरआरटीएस)

MTNL Mobile Network Condition on Delhi Metro

मेट्रो ट्रेनों के मोबाइल नेटवर्क की जांच में सबसे कमजोर एमटीएनएल साबित हुआ
Photo Credit: PIB

जांच में क्या पाया गया?

जांच के दौरान केवल कॉलिंग ही नहीं बल्कि इंटरनेट स्पीड, सिग्नल स्ट्रेंथ, कवरेज गैप, कॉल ड्रॉप, डेटा अपलोड और डाउनलोड जैसी कई चीजों का परीक्षण किया गया. इस जांच में सबसे बड़ी चिंता कवरेज गैप को लेकर सामने आई है. कवरेज गैप का मतलब है वह स्थिति जब मोबाइल सिग्नल तय न्यूनतम स्तर से नीचे चला जाए. यानी फोन में नेटवर्क दिख रहा हो लेकिन उसकी गुणवत्ता इतनी कमजोर हो कि कॉलिंग या इंटरनेट प्रभावित होने लगे.

किस नेटवर्क की हालत सबसे ज्यादा खराब मिली?

रिपोर्ट में सबसे ज्यादा कवरेज गैप एमटीएनएल नेटवर्क पर दर्ज हुआ. जांच के दौरान एमटीएनएल के 43,220 नमूनों में से 20,768 जगहों पर सिग्नल निर्धारित मानकों से कमजोर पाया गया. दूसरी तरफ एयरटेल के 52,666 नमूनों में 1,280, रिलायंस जियो के 52,325 नमूनों में 1,297 और वोडाफोन के 52,753 नमूनों में 1,490 कमजोर सिग्नल वाले पॉइंट मिले.

मैप में लाल बिंदुओं के जरिए उन स्थानों को भी दिखाया गया है जहां नेटवर्क की क्वालिटी खराब मिली. इनमें दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ की दिशा में कुछ हिस्से खास तौर पर चिन्हित किए गए हैं.

यह आंकड़े बताते हैं कि निजी कंपनियों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही. हालांकि मोबाइल नेटवर्क के मामले में निजी कंपनियों की भी पूरी तरह आदर्श स्थिति नहीं हैं. दरअसल, दिल्ली मेट्रो में नेटवर्क की समस्या किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है. फर्क सिर्फ इतना है कि कहीं समस्या कम है तो कहीं ज्यादा.

Rajiv Chowk Metro Station

राजीव चौक मेट्रो स्टेशन
Photo Credit: PTI

दिल्ली मेट्रो दुनिया के सबसे जटिल शहरी यातायात के साधनों में से एक है. इसकी कई लाइनें जमीन के नीचे से सुरंग होकर गुजरती हैं, जैसा कि राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर है, जहां अक्सर आपके मोबाइल का नेटवर्क टूट जाता है. कई ट्रैक एलिवेटेड हैं और अधिकांश मेट्रो ट्रैक पर ट्रेनें लगातार तेज गति से चलती हैं. ऐसे में आपके मोबाइल फोन को बार-बार एक टावर से दूसरे टावर पर स्विच करना पड़ता है.

टेक्निकल लैंग्वेज में इसे हैंडओवर कहा जाता है.

अगर ये हैंडओवर की प्रक्रिया एक सेकेंड के लिए प्रभावित होती है तब इंटरनेट की स्पीड धीमी हो जाती है और मोबाइल कॉल के क्वालिटी पर भी असर पड़ता है. यानी जब आपके मोबाइल हैंडसेट टावर को हैंडओवर कर रहे होते हैं तो आपको अपने फोन पर आवाज सही से नहीं आ रही होती है या फिर इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप्प समेत अन्य इंटरनेट गतिविधियों में रुकावट आती है.

साथ ही दिल्ली मेट्रो में रोज लाखों की संख्या में लोग सफर करते हैं. अमूमन सभी के हाथ में आज स्मार्टफोन मौजूद हैं. ऐसे में मेट्रो के पीक ऑवर में कई हजार की संख्या में लोग एक साथ वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो कॉलिंग करते हैं.

Mobile Network

Photo Credit: PTI

5जी आया, स्पीड भी मिल रही, पर क्या समस्या खत्म हो गई?

जब भारत में 5जी लॉन्च हुआ था तो उम्मीद थी कि नेटवर्क की अधिकांश समस्याएं खत्म हो जाएंगी. लेकिन ट्राई की रिपोर्ट एक अलग तस्वीर दिखाती है.

डेटा स्पीड में 5जी ने शानदार प्रदर्शन किया. रिलायंस जियो की औसत डाउनलोड स्पीड 141.28 एमबीपीएस दर्ज की गई. एयरटेल की डाउनलोड स्पीड 81.72 एमबीपीएस रही. 

यह स्पीड कई घरेलू ब्रॉडबैंड कनेक्शन से भी ज्यादा है. लेकिन सवाल केवल स्पीड का नहीं है.

सबसे बड़ा मसला सिग्नल के कमजोर पड़ने का है, अगर मेट्रो पर सफर के दौरान 140 एमबीपीएस की स्पीड मिल रही है, पर अचानक सिग्नल कमजोर पड़ जाए तो मोबाइल यूजर्स का अनुभव खराब ही रहेगा. यही वजह है कि अब टेलीकॉम इंडस्ट्री में केवल स्पीड नहीं बल्कि, नेटवर्क लगातार बना रहे, इस पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है.

Photo Credit: ANI

दुनिया के बड़े शहरों ने भी झेली है नेटवर्क की समस्या

दिल्ली अकेला शहर नहीं है. लंदन अंडरग्राउंड, न्यूयॉर्क सबवे, पेरिस मेट्रो और टोक्यो मेट्रो में भी वर्षों तक नेटवर्क कवरेज एक बड़ी चुनौती रही है.

लंदन में तो पूरे अंडरग्राउंड नेटवर्क में मोबाइल कवरेज उपलब्ध कराने के लिए अलग से कई वर्षों तक चलने वाली परियोजना शुरू करनी पड़ी थी.

भारत में भी मुंबई मेट्रो की भूमिगत एक्वा लाइन में यात्रियों को बेहतर नेटवर्क देने के लिए विशेष दूरसंचार व्यवस्था विकसित की गई.

अब यह रिपोर्ट सभी संबंधित टेलीकॉम कंपनियों को भेज दी गई है. उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कमजोर नेटवर्क वाले हिस्सों में अतिरिक्त उपकरण लगाए जाएंगे और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी.

लेखक के बारे में
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अभिजीत श्रीवास्तव
Assistant Editor, Digital Content
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