दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए दवाइयों, मेडिकल इक्विपमेंट और हेल्थकेयर सप्लाई की खरीद में कथित गड़बड़ियों की जांच एंटी-करप्शन ब्रांच ने तेज कर दी है. इस मामले में दो और पूर्व सीनियर अधिकारियों को 7 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. जांच अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, खरीद प्रक्रिया से जुड़े प्राइवेट लोगों से भी पूछताछ हो सकती है.
हेल्थ सर्विसेज की पूर्व डायरेक्टर जनरल (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल और सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के अकाउंट्स के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर नीरज चोपड़ा को खरीद प्रक्रियाओं में कथित हेरफेर से जुड़ी FIR नंबर 07/2026 के सिलसिले में अरेस्ट किया गया था. इससे पहले CPA के पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा भी गिरफ्तार किए गए थे. अब तक मामले में तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.
नुकसान के बारे में अभी किसी भी नतीजे पर नहीं
ACB के एक सूत्र ने कहा कि एजेंसी अभी तक कुल आर्थिक नुकसान के बारे में किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंची है. हालांकि करीब 650-700 करोड़ रुपये की खरीद-फरोख्त की जांच हो रही है. जांचकर्ता ये पता लगा रहे हैं कि असल में कितना सामान सप्लाई किया गया था, क्या कीमतें बढ़ाई गई थीं और क्या इससे कोई गलत फायदा उठाया गया था.
अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती तौर पर ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ सामान की कीमत ज्यादा हो सकती है, लेकिन सही जानकारी रिकॉर्ड की बारीकी से जांच के बाद ही दी जा सकेगी. उन्होंने कहा कि जांच अभी शुरुआती दौर में है. जांच के दौरान मिले सबूतों पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी. अगर किसी प्राइवेट कंपनी या व्यक्ति की भूमिका सामने आई तो उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.
कॉन्ट्रैक्ट से किसे फायदा हुआ, हो रही जांच
बता दें कि विजिलेंस डिपार्टमेंट द्वारा खरीद प्रक्रियाओं में कुछ संदिग्ध लेन-देन और नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा किए जाने के बाद मामले की जांच शुरू की गई.एजेंसी अभी इस बात की जांच कर रही है कि कथित अनियमितताएं किस चरण में हुईं, कॉन्ट्रैक्ट से किसे फायदा हुआ, और क्या इस घोटाले में और अधिकारी या निजी संस्थाएं शामिल थीं.
जांचकर्ताओं को शक है कि टेंडर की शर्तों को ऐसे डिजाइन किया गया था कि कॉम्पिटिशन कम हो और मेडिकल इक्विपमेंट, दवाइयों, सर्जिकल सामान, बेड लिनन, पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल इक्विपमेंट और अन्य हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स के लिए ज़्यादा कीमतों पर कॉन्ट्रैक्ट दिए जा सकें.
बिचौलिए की भूमिका की भी जांच
ACB एक कथित बिचौलिए की भूमिका की भी जांच कर रही है. उस पर अधिकारियों और प्राइवेट सप्लायर्स के बीच संपर्क बनाए रखने का शक है. सूत्रों के मुताबिक, यह संदिग्ध कई फर्मों के जरिए काम करता था और खरीद से जुड़े फैसलों को प्रभावित करता था, हालांकि जांचकर्ता अभी इसमें शामिल संस्थाओं के बारे में किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुचे हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, अभी कई एजेंसियों से रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं, जिनमें रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) भी शामिल है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खरीद प्रक्रिया से जुड़ी कोई फर्म कोई शेल कंपनी तो नहीं थी. कथित मनी ट्रेल का पता लगाने के लिए फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स, खरीद से जुड़ी फाइलें और पेमेंट रिकॉर्ड की जांचे जा रहे हैं. जांचकर्ताओं ने कहा कि मामले की जांच चल रही है. नए सबूत मिलने पर और भी लोग जांच के दायरे में आ सकते हैं.
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