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This Article is From Aug 11, 2017

मौत के मुंह से बचा सफाई कर्मचारी आया सामने, कई बातों का किया खुलासा 

गटर हादसे में जिंदा बचे राकेश ने गुरुवार को NDTV से बात करते हुए कई बातों का खुलासा किया.

मौत के मुंह से बचा सफाई कर्मचारी आया सामने, कई बातों का किया खुलासा 
प्रतीकात्मक फोटो.
नई दिल्ली: दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में 6 अगस्त 2017 को जब तीन मज़दूरों की गटर साफ करते हुए मौत हो गई थी तब कई अखबार और टेलीविजन में यह खबर दिखाया गया था. कई जगह यही लिखा हुया था इन तीनों को बचाने गटर में उतरा चौथा मज़दूर बाल-बाल बच गया है और इसका इलाज अस्पताल में चल रहा है. कई नेताओं का भी यही बयान आया था कि चौथे मज़दूर का इलाज सरकारी अस्पताल में हो रहा है. लेकिन हर किसी ने इस हादसे में बचे चौथे मज़दूर राकेश से बिना बात किए यह खबर लिखा था और बयान दिया था. यह भी हो सकता है कि कई मीडियाकर्मी और नेता बात करने की कोशिश किए हों, लेकिन बात नहीं हो पाया हो. कइयों को यह भी लगा होगा राकेश अस्पताल में है तो बात कैसे करेगा.  

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अस्पताल में एडमिट करने की बात गलत
गुरुवार को NDTV से बात करते हुए राकेश ने कई बातों का खुलासा किया. राकेश ने मीडिया, नेता और पुलिस पर भी सवाल उठाए. राकेश ने कहा कि वो इस हादसे में बाल-बाल बच गया था और कई जगह यह लिखा गया कि राकेश का अस्पताल में इलाज चल रहा है. कुछ नेताओं ने भी इलाज की बात कही थी, लेकिन राकेश का कहना है कि उसका इलाज किसी अस्पताल में नहीं किया गया. किसी ने उसे अस्पताल नहीं पहुंचाया. गटर से बाहर निकलने के थोड़ी देर बाद उसको होश आया. इसके बाद उसे पुलिस पूछताछ के लिए ले गई. पूछताछ के बाद देर रात वह पुलिस स्टेशन से घर पहुंचा और अगले दिन भी उसे थाना जाना पड़ा. इस वजह से वह अपने भतीजे के दाह संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाया था. जो तीन लोगों की मौत हुई थी, उनमें एक राकेश की भतीजा था और दूसरा भांजा था. राकेश ने कहा कि मीडिया वालों ने उससे बिना बात किए और बिना मिले यह लिखा कि राकेश का इलाज चल रहा है. 

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राकेश के पास अब कोई काम नहीं
NDTV से बात करते हुए राकेश ने कहा अब उसके पास कोई काम नहीं है. इस हादसे के बाद जिस ठेकेदार के अंदर वह काम करता था वह फ़रार है. अब कोई दूसरा ठेकेदार उसे काम नहीं दे रहा है. राकेश ने यह भी बताया कि जिन मज़दूरों की मौत हुई थी उन्हें पैसा मिला, लेकिन अब राकेश को कुछ नहीं मिला है. राकेश ने कहा कि गुरुवार को वह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिला था. मुख्यमंत्री ने मदद का भरोसा दिया है. इस हादसे के बाद राकेश हिल गया है. एक तरफ उसके रिश्तेदारों की मौत तो वहीं, दूसरे तरफ उसे अपने परिवार चलाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. बात करते हुए राकेश काफी भावुक भी हो गया. राकेश ने कहा इन तीन मज़दूरों के साथ अगर वह भी मर जाता तो शायद अब तक उसकी मदद हो गई होती. 

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हादसे की आपबीती बताई
राकेश ने बताया कि 6 अगस्त को खुद राकेश और तीन मज़दूर दिन के करीब 11 बजे लाजपत नगर में गटर साफ कर रहे थे. एक ड्राइवर भी साथ में था. राकेश और दूसरे मज़दूर तीन ढक्कन खोलकर साफ कर चुके थे और जब चौथा ढक्कन खोलने चाहे तो वह नहीं खुला. इसके बाद राकेश हथौड़ा लेने के लिए चला गया. इस बीच तीन ढक्कन खोल दिए और उनमें से एक गटर साफ करने के लिए अंदर गया, लेकिन वह वापस नहीं आया. आवाज़ भी नहीं दिया. इस मज़दूर को बचाने के लिए दूसरा मज़दूर अंदर गया और वह भी नहीं लौटा. तीसरे ने भी ऐसा ही किया और वो भी नहीं लौटा. गटर के अंदर मौजूद ज़हरीली गैस से इन तीनों की मौत हो चुकी थी.

फिर बाहर खड़े ड्राइवर ने राकेश को तुरंत फ़ोन किया. राकेश भागकर आया और देखा पुलिस के साथ-साथ और कई लोग जमा हैं. अपने जान की परवाह न करते हुए राकेश इन लोगों को बाहर निकालने के लिए गटर के अंदर गया और जाते ही ज़हरीली गैस से बेहोश हो गया. राकेश को तुरंत बाहर निकाला गया, जिससे उसकी जान बच सकी.
 

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