नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में रहा. इस आंदोलन में CJP की भूमिका प्रमुख रही और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में से एक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था. अब धर्मेंद्र प्रधान द्वारा प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंपे जाने के बाद आंदोलन और उसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. इसी क्रम में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
जस्टिस काटजू ने अपने पोस्ट में लिखा,
"धर्मेंद्र प्रधान ने बेशक इस्तीफा दे दिया है, और जंतर-मंतर पर ये जोकर जश्न मना रहे हैं. लेकिन क्या इससे कुछ बदलेगा? मेरी राय में कुछ नहीं बदलेगा. पेपर लीक भ्रष्टाचार की वजह से होते हैं, और भारत में हर लेवल पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है, सिर्फ पेपर लीक में ही नहीं. 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को बहुत सपोर्ट मिला, लेकिन आखिरकार वह खत्म हो गया, और कुछ हासिल नहीं हुआ (सिवाय अरविंद केजरीवाल को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाने के, जो खुद भ्रष्ट निकले). इसलिए पेपर लीक होते रहेंगे, और इसके खिलाफ बने कानून पुलिस को पैसे ऐंठने का एक और मौका देंगे. जहां तक कॉकरोच की बात है, ये जोकर, बेवकूफ और बेवकूफ जंतर-मंतर पर जमा हुए हैं, वे अब अपनी पिकनिक, मौज-मस्ती और मौज-मस्ती के बाद घर जा सकते हैं. जैसा कि उर्दू कवि आतिश ने कहा है: 'बस हो चुकी नमाज़, मुसल्ला उठाइए'"
@CJP_for_India @CJP_2029 @Cockroachisback @Wangchuk66 @SauravDassss
— Markandey Katju (@mkatju) July 25, 2026
Dharmendra Pradhan has no doubt resigned, and these jokers at Jantar Mantar are celebrating. But will it change anything ? In my opinion nothing will change.
Paper leaks are due to corruption, and there is…
कौन हैं जस्टिस मार्कंडेय काटजू?
मार्कंडेय काटजू भारत के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज हैं. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और 1991 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज बने. बाद में वे मद्रास हाई कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे. वर्ष 2006 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. सेवानिवृत्ति के बाद वे 2011 से 2014 तक भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष भी रहे.
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