दिल्ली सरकार ने दक्षिणी रिज के लगभग 1000 एकड़ यानी 400 हेक्टेयर इलाके को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद राजधानी का संरक्षित रिज एरिया का दायरा बढ़कर करीब 13000 एकड़ हो जाएगा. सीएम रेखा गुप्ता ने ये भी कहा कि सरकार रिज के उन हिस्सों के जीर्णोद्वार पर भी ध्यान केंद्रित करेगी, जो वर्षों से खराब हो चुके हैं. सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य भूमि को कानूनी संरक्षण प्रदान करना नहीं है, बल्कि रिज के इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करना भी जरूरी है. लगभग 6,200 हेक्टेयर में फैला दक्षिणी रिज दिल्ली के रिज सिस्टम का सबसे बड़ा हिस्सा है. 30 साल पहले ये प्रक्रिया 1994 में शुरू हुई थी, जब दिल्ली रिज के बड़े हिस्से को वन संरक्षण के लिए चिन्हित किया गया था, लेकिन कई क्षेत्रों को आरक्षित वन क्षेत्र का दर्जा पाने के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ा.
तीन दशकों से पेडिंग पड़े इस काम में इस साल तेजी देखने को मिली. दक्षिणी रिज के कुछ हिस्सों को मार्च में रिजर्व फॉरेस्ट का दर्जा दिया. इसके बाद मई में सेंट्रल रिज को भी यही संरक्षण मिला. जुलाई तक 5000 हेक्टेयर भूमि को रिजर्व फॉरेस्ट का दर्जा मिल चुका था. अब दक्षिणी रिज के 400 हेक्टेयर क्षेत्र को यही दर्जा दिया गया है.
बता दें कि दिल्ली रिज अरावली पर्वतमाला का ही विस्तार और राजधानी का सबसा बड़ा प्राकृतिक हरित क्षेत्र है. वैसे ये इलाका वृक्षों की कटाई, निर्माण और अतिक्रमण से जुड़े अदालती मामलों का केंद्र भी रहा है. सरकार का कहना है कि इस क्षेत्र को जीर्णोद्धार के लिए देसी पौधों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. रिज के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए इस साल दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड का भी गठन किया गया है. वहीं दक्षिण रिज के कुछ हिस्से अभी भी अतिक्रमण, बस्तियों और अनाधिकृत कॉलोनियों और अन्य मुद्दों में फंसे हुए हैं. अधिकारी इसकी जांच में लगे हैं ताकि उचित प्रक्रिया के तहत इसे संरक्षित किया जा सके. सरकार का कहना है कि रिज की और जमीन को चरणबद्ध तरीके से रिजर्व फॉरेस्ट की श्रेणी में लाया जाएगा.
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