दिल्ली के सरिता विहार के रहने वाले 31 साल के युवराज सिंह मनचंदा की गुरुग्राम में हत्या कर दी गई और परिवार उसकी तलाश करता रहा. वह 6 सितंबर की शाम को एक मीटिंग की बात कहकर गुरुग्राम गया था लेकिन घर नहीं लौटा. परेशान परिवार ने 11 सितंबर को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई और उसकी हत्या की जानकारी परिवार को 16 सितंबर को मिली. उनका परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था.
जब उन्हें पता चला कि जिस बेटे के लौटने का इंतजार वे कर रहे थे, उसकी कई दिन पहले ही हत्या हो चुकी थी. लेकिन उसके फोन से मैसेज भेजकर परिवार को लगातार यह भरोसा दिलाया जाता रहा कि वह सुरक्षित है और जल्द घर लौट आएगा. बाद में खुलासा हुआ कि ये मैसेज खुद युवक नहीं बल्कि उसके कथित हत्यारे भेज रहे थे.
शादी की खरीदारी के बाद गया था बैठक में
परिजनों के मुताबिक युवराज सिंह मंचंदा की शादी एक महीने बाद होने वाली थी. 6 सितंबर को वह अपनी बहनों के साथ शादी की खरीदारी करने गया था. परिवार ने उसकी शेरवानी भी तय कर ली थी. इसी दौरान युवराज ने बताया कि उसे अपनी पूर्व महिला सहकर्मी से एक जरूरी बैठक के लिए मिलना है.
युवराज ने अपनी बहनों, मंगेतर और अपने बॉस को भी इस बैठक की जानकारी दी थी. शाम करीब साढ़े सात बजे उसने परिवार को बताया कि महिला सहकर्मी करीब 20 मिनट में पहुंचने वाली है और बैठक के बाद वह फोन करेगा. लेकिन इसके बाद उसका फोन बंद हो गया और उससे कोई बात नहीं हो सकी.
परिजनों को आते रहे रहस्यमय मैसेज
युवराज के परिवार ने बताया कि 8 सितंबर को उनके फोन पर युवराज के व्हाट्सएप से मैसेज आए. इनमें लिखा था कि वह ठीक है और चिंता करने की जरूरत नहीं है. एक मैसेज में कहा गया कि वह शनिवार को वापस आएगा जबकि बाद में वापसी की तारीख बदलकर गुरुवार बताई गई.
यही बात परिवार को खटकने लगी. बहनों ने वीडियो कॉल पर बात करने की कोशिश की और उससे चेहरा दिखाने को कहा. परिवार का कहना है कि युवराज कभी बिना बताए कई दिनों तक गायब नहीं रहता था. जब कोई जवाब नहीं मिला तो 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई.
पुलिस जांच में सामने आई खौफनाक कहानी
पुलिस जांच में आरोप लगा कि युवराज की पूर्व सहकर्मी अन्या वात्स और उसके पति संयम सचदेवा ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया. जांच के अनुसार दोनों ने पहले युवराज से उसकी कार एक जगह खड़ी करवाई और फिर उसे अपनी एसयूवी में बैठा लिया.
पुलिस का दावा है कि कार में बैठने के कुछ देर बाद पीछे बैठी अन्या ने युवराज की गर्दन पर गोली मार दी. हत्या के बाद आरोपी कुछ समय तक शव को अपने साथ लेकर घूमते रहे और बाद में उसे एक नाले में फेंक दिया.
पैसों के विवाद को माना जा रहा वजह
प्रारंभिक जांच में आर्थिक विवाद को हत्या की वजह माना जा रहा है. युवराज और आरोपी पहले एक रियल एस्टेट कंपनी में साथ काम कर चुके थे. बताया जा रहा है कि अन्या को वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में नौकरी से निकाला गया था. बाद में वह फ्रीलांस काम कर रही थी और युवराज के साथ कुछ प्रॉपर्टी डील में भी जुड़ी हुई थी. पुलिस को जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले कि आरोपी दंपति की आमदनी सीमित थी लेकिन वे बेहद आलीशान जीवनशैली जी रहे थे.
शव के अंतिम संस्कार पर भी उठे सवाल
युवराज के परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस को 10 सितंबर को ही शव मिल गया था लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई. परिवार का यह भी कहना है कि पहचान के लिए जरूरी सूचना समय पर संबंधित नेटवर्क पर साझा नहीं की गई. बाद में 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया. परिजन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जांच दस्तावेज, तस्वीरें, डीएनए नमूने और युवराज का सामान सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं. परिवार का कहना है कि युवराज अपने माता-पिता का एकमात्र सहारा था. उसके पिता लकवाग्रस्त हैं जबकि मां हृदय रोग से पीड़ित हैं. बेटे की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
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