दिल्ली में नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की 27 दिन से चल रही हड़ताल मंगलवार को समाप्त हो गई.
- सफाई कर्मचारी 12 सितंबर से हड़ताल पर थे
- दिल्ली सरकार बकाया सेलरी देने के लिए 500 करोड़ देने को तैयार
- अस्थायी सफाई कर्मचारियों को परमानेंट करने की मांग काफी अहम थी
नई दिल्ली:
दिल्ली में 27 दिन से जारी सफाई कर्मियों की हड़ताल आखिरकार मंगलवार को खत्म हो गई. अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग दिल्ली नगर निगम ने मान ली है. बाकी तीन मांगें नहीं मानी गई हैं. सफाई कर्मी बुधवार को काम पर लौट जाएंगे.
अस्थायी सफाई कर्मचारियों को परमानेंट करने की मांग काफी अहम थी जो कि मान ली गई है. इसके अलावा वेतन नियमित रूप से देने की भी मांग सफाई कर्मियों ने की थी जो फिलहाल स्वीकार नहीं की गई.
करीब महीने भर से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से गंदगी की समस्या बढ़ती जा रही थी. इस आंदोलन को लेकर दिल्ली का आम आदमी पार्टी सरकार और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का भी दौर चलता रहा. दिल्ली के बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और सीएम अरविंद केजरीवाल ने एक-दूसरे पर लगातार आरोप लगाए.
यह भी पढ़ें : दिल्ली के सफाई कर्मचारियों का बकाया वेतन देने के लिए रकम नहीं देगा केंद्र
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है. इस मामले में सोमवार को सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह सफाई कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए कोई रकम नहीं देगी. केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG मनिंदर सिंह ने कहा कि ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान या नियम नहीं है कि केंद्र एमसीडी को ऐसा कोई फंड जारी करे.
इससे पहले हुई सुनवाई में दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वह एमसीडी के सफाई कर्मचारियों की बकाया सेलरी देने के लिए 500 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार है. इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या केंद्र सरकार भी इतनी ही रकम देने को तैयार है? इसके जवाब में ASG ने सोमवार को कोर्ट को इसकी जानकारी दी.
VIDEO : नगर निगम के सफाई कर्मियों का आंदोलन खत्म
अब दिल्ली सरकार के हलफनामे के जवाब में केंद्र सरकार को 24 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल करना है. सफाई कर्मचारी 12 सितंबर से हड़ताल कर रहे थे.
अस्थायी सफाई कर्मचारियों को परमानेंट करने की मांग काफी अहम थी जो कि मान ली गई है. इसके अलावा वेतन नियमित रूप से देने की भी मांग सफाई कर्मियों ने की थी जो फिलहाल स्वीकार नहीं की गई.
करीब महीने भर से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से गंदगी की समस्या बढ़ती जा रही थी. इस आंदोलन को लेकर दिल्ली का आम आदमी पार्टी सरकार और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का भी दौर चलता रहा. दिल्ली के बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और सीएम अरविंद केजरीवाल ने एक-दूसरे पर लगातार आरोप लगाए.
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सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है. इस मामले में सोमवार को सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह सफाई कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए कोई रकम नहीं देगी. केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG मनिंदर सिंह ने कहा कि ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान या नियम नहीं है कि केंद्र एमसीडी को ऐसा कोई फंड जारी करे.
इससे पहले हुई सुनवाई में दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वह एमसीडी के सफाई कर्मचारियों की बकाया सेलरी देने के लिए 500 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार है. इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या केंद्र सरकार भी इतनी ही रकम देने को तैयार है? इसके जवाब में ASG ने सोमवार को कोर्ट को इसकी जानकारी दी.
VIDEO : नगर निगम के सफाई कर्मियों का आंदोलन खत्म
अब दिल्ली सरकार के हलफनामे के जवाब में केंद्र सरकार को 24 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल करना है. सफाई कर्मचारी 12 सितंबर से हड़ताल कर रहे थे.
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